कई धार्मिक पुराणों में स्वर्ग लोक और पाताल लोक का वर्णन मिलता है स्वर्ग लोक में देवताओं का वास होता है और पाताल लोक राक्षसों का निवास होता है इनके बीच पृथ्वी है जहां मनुष्य रहते है भारत में ही एक ऐसी जगह है जिसे पाताल लोक कहा जाता है


सतउपुड़ा पर्वत श्रेणियों कि गोद में बसा यह स्थान प्राकृतिक का अजूबा है जमीन से 1700 फुट कि गहराई में बसे इस क्षेत्र को पातालकोट यूँ ही नहीं कहा जाता है इससे जुड़े कई रहस्य ,पौराणिक कथाएं और तथ्य है


शहर कि चकाचोंध से दूर पातालकोट में न तो आपको गगनचुंबी इमारत नजर आएंगी और न ही यहां आपको शहरों जैसी हाई -फाई लाइफस्टाइल दिखेगी चरों और से पहाड़ों और जंगलों से घिरे पातालकोट में 12 गांव है


रामायण काल में जब राम -रावण युद्ध हो रहा था तन अपने आराध्य भगवान शिव कि आराधना के लिए रावण का पुत्र मेघनाथ इसी स्थान पर आया था इस बात का पता जब हनुमान जी को चला तो वह अपनी वानर सेना के साथ वहां पहुंच गए थे और मेघनाथ कि पूजा को भंग कर दिया था पाताल कोट में रहने वाले लोग अभी भी मिटटी और घास -फुस के घर बना कर जीवन यापन कर रहे है इस क्षेत्र में दुर्लभ जड़ी बूटियां पाई जाती है यहां के लोग आम के पेड़ भी खूब उगाते है


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