देश में देवी के 51 शक्तिपीठ है जिसमें से 4 आदिशक्ति पीठ माने जाते है जो देश के पूर्व में स्थित है चार आदिशक्ति पीठ में उड़ीशा का तारा तारिणी मंदिर भी शामिल है यह मंदिर दो जुड़वां देवियों यानि तारा और तारिणी को समर्पित है


17वीं शताब्दी का तारा तारिणी एक प्राचीन मंदिर है इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 999 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है जो कि तारा तारिणी पहाड़ी या फिर पूर्णागिरि पहाड़ी के ऊपर स्थित है इस मंदिर को वास्तुकला कि रेखा शैली का उपयोग करके बनाया गया है और देवी तारा तारिणी कलिंग साम्राज्य के शासकों कि प्रमुख देवी है


चैत्र के महीने में तारा तारिणी मंदिर में श्रद्धालुओं कि भीड़ उमड़ पड़ती है चैत्र महीने में हर मंगलवार को यहां भव्य मेला आयोजित किया जाता है चैत्र महीने में लोग अपने बच्चे के एक साल पूरा होने पर मुंडन करवाने के लिए यहां आते है


ब्रह्मपुर शहर पहुंचने के बाद आप इस मंदिर तक आसानी से पहुंच सकती है वही गाड़ी या फिर सड़के के रस्ते से भी आप इस शहर तक पहुंच सकती है इसके आलावा यहां रेल कि भी सुविधा है


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