भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कुतर्क में जवाब नहीं. बिहार के उप मुख्यमंत्री हैं सुशील कुमार मोदी. उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हां मंत्री भी कहा जाता है. सियासी गलियारों में उन्हें नीतीश कुमार का तोता कहा जाता है. कई और नाम से भी वे पुकारे जाते हैं. नीतीश कुमार के लिए अपनी पार्टी के खिलाफ भी वे जाते रहे हैं. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले सुशील मोदी नीतीश कुमार में है पीएम मैट्रियल देखा करते थे. लालू विरोध और नीतीश प्रेम में वे किसी हद तक जा सकते हैं. सुशील कुमार मोदी की अपने पार्टी में विरोधी कम नहीं हैं लेकिन उनके अच्छे दिन चल रहे हैं तो न गिरिराज सिंह उनका कुछ बिगाड़ पा रहे हैं और न ही रविशंकर प्रसाद या कोई और. सुशील कुमार अपने अजब-गजब बयान के लिए भी जाने जाते हैं. वे वित्त मंत्री भी हैं. उनके कार्यकाल में ही भागलपुर का सृजन घोटाला हुआ. उनके कार्यकाल में ही सृजन को ननबैंकिंग का रजिस्ट्रेशन हुआ. उनकी रिश्ते की बहन रेखा मोदी का नाम भी इस घोटाला में आया लेकिन वे पाक-साफ हैं क्योंकि नीतीश कुमार उनके साथ हैं.

अपने बयानों के लेकर भी वे कम चर्चा में नहीं रहे हैं. पिछले साल पतृपक्ष मेले का उद्घाटन करते हुए उन्होंने बिहार के अपराधियों से हाथ जोड़ कर अपील की थी कि इन पंद्रह दिनों में वे अपराध नहीं करें. हाल ही में आर्थिक मंदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि सावन-भादो में मंदी हो ही जाती है, यह कोई नई बात नहीं. उनके इस बयान पर भी उनके सामान्य ज्ञान पर खूब सवाल उठे. उनकी आलोचना हुई लेकिन सुशील मोदी कहां मानने वाले. अब उनका नया बयान उनके सामान्य ज्ञान को तो सामने ला ही रहा है, उन्हें निर्मला सीतारमण, संतोश गंगवार और पीयूष गोयल की कतार में ला खड़ा कर दिया है. दो दिन पहले उन्होंने ऑटो सेक्टर की मंदी पर बयान दिया था कि पितृपक्ष की वजह से लोग गाड़ियां नहीं खरीद रहे हैं. अब उनका नया ज्ञान सामने आया है.

सुशील मोदी का मंदी पर अजब-गजब बयान आया. रांची में एक चैनल के कार्यक्रम में उन्होंन कहा कि देश में पारले-जी बिस्कुट की बिक्री शायद इसलिए घट गई है क्योंकि लोगों ने बिस्कुट खाना छोड कर पेस्ट्री खाना शुरू कर दिया है. मोदी ने कहा कि देश में एक कॉरपोरेट लॉबी है जो मंदी की झूठी कहानी फैला रहा है. सुशील मोदी ने कहा है कि देश में आर्थिक मंदी नहीं है, बल्कि कर कम किए जाने के लिए बड़ी कंपनियां सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है. उपमुख्यमंत्री ने पारले जी बिस्कुट कंपनी का उदाहरण देते हुए कहा कि वास्तव में बिहार में इस बिस्कुट की मांग बढ़ी है. 

सुशील मोदी ने कहा कि मैं नहीं जानता कि कैसे पारले जी बिस्कुट की बिक्री घट गई है. अगर लोगों ने बिस्कुट छोड़कर पेस्ट्री खाना शुरू कर दिया है तो यह अलग बात है. सुशील मोदी ने कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य में पारले-जी बिस्कुट की बिक्री बढ़ी. पिछले महीने पारले प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने कहा था कि वे दस हजार कर्मचारियों की छंटनी करने जा रहा है क्योंकि पारले जी की बिक्री कम हो गई है. पारले कंपनी के अधिकारियों ने कहा था कि स्थिति खराब है और अगर सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया तो उन्हें और कड़े कदम उठाने होंगे. पारले कंपनी ने बिस्कुट पर जीएसटी की ज्यादा दर को बिक्री कम होने का कारण बताया था. कमोबेश ऐसे ही हालात ब्रिटेनिया का भी है. लेकिन सुशील मोदी को यह दिखाई नहीं दे रहा है. वे कहते हैं कि केरल और तमिलनाडु जैसे विकसित राज्यों में इन बिस्कुटों के स्थान पर पेस्ट्री खाना शुरू कर दिए जाने से क्या ऐसा हो सकता है.

देश की आर्थिक स्थिति को लेकर बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के दावे पर मुख्य विपक्षी पार्टी राजद और महागठबंधन की सहयोगी रालोसपा ने कटाक्ष किया. सुशील मोदी को अपनी टिप्पणियों के लिए ट्विटर पर भी काफी आलोचना का सामना करना पड़ा. राजद नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने उन्हें कुतर्क का मास्टर बताया और कहा कि पंद्रह साल राज करने के बाद भी अफ़वाह महाशय कह रहे हैं कि बिहार ग़रीब राज्य है. नीतीश सरकार हर मोर्चे पर नाकाम है और सरकार इसे स्वीकार कर अपनी ही ज़ुबानी गवाही दे रहे है. बिहार में लोगों को नून-रोटी नसीब नहीं हो रहा है और ये महोदय टीवी पर बिस्कुट-केक खाने की परिकथाएं सुना रहे है. बिहार के सबसे बड़े कुतर्क मास्टर सुशील मोदी कभी कहते है सावन-भादो की वजह से मंदी है. कभी कहते है पितृ पक्ष, कभी खरमास, कभी बाढ़-सुखाड़ तो कभी क़ानून व्यवस्था-प्राकृतिक आपदा की वजह से मंदी है. इनके बेतुके कुतर्कों का भावार्थ है कि युवा घबराए नहीं अगले 30 साल में नौकरी मिल जाएगी.

रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सुशील कुमार मोदी के ज्ञान पर तंज कसा है और कहा है कि सुशील कुमार उस राजा की तरह बातें करने लगे हैं जो रोटी की जगह केक खाने की सलाह देता था. लेकिन विपक्ष तो इन बयानों को लेकर हमलावर है ही, सुशील मोदी के बयानों से भाजपा भी बैकफुट पर है. कई तरह के किस्से-कहानी सुनाए जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर यह चुटकुला काफी लोकप्रिय हो रहा है कि एक राजा का एक प्रिय हाथी बीमार हो गया, उसके बचने की अब कोई आशा नहीं थी. एक दिन राजा ने घोषणा की जो भी मेरे प्रिय हाथी की मरने की सूचना मुझे देगा, मै उसे मृत्युदंड दूंगा. एक दिन अचानक हाथी मर गया. अब राजा को कौन हाथी के मरने की सूचना दे. इसे लेकर पसोपेश था.

तब हाथी की देखभाल करने वाले महावत ने दरबार मे जाकर राजा से कहा की महाराज आज सुबह से आपका प्रिय हाथी न उठ रहा है, न पानी पी रहा है, न कुछ खा रहा है और न ही सांस ले रहा है. तब राजा ने पूछा क्या मेरा हाथी मर गया, तो महावत ने कहा कि महाराज यह तो आप ही कह सकते हैं. ऐसा ही कुछ हाल भारतीय अर्थव्यवस्था का है. नरेंद्र मोदी के मंत्री-नेता अपने अपने ढंग से हाथी के मरने की सूचना दे रहे है. हाथी मर गया है, यह कोई नहीं कह रहा है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).

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