बाबुल सुप्रियो गायक थे. अभी भी चैनलों पर गा लेते हैं. नेता वे थे बना डाले गए. आसनसोल से सांसद हैं. केंद्र में मंत्री भी हैं. लगातार दूसरी बार वे जीते हैं लेकिन उनका अपना जनाधार नहीं है. नरेंद्र मोदी के कंधे पर सवार होकर वे दोनों बार चुनाव जीत गए. लेकिन अपने बूते वे कुछ हजार की भीड़ भी जुटा पाने में सक्षम नहीं हैं. सियासी तौर पर उनके पास अपनी जमीन नहीं है. इस जमीन को तलाशने के लिए वे विवादों में रहते हैं. लेकिन विवाद भी उनकी मदद सियासी तमीन तैयार करने में नहीं कर पा रहा है. चर्चा में वे जरूर रहते हैं. लेकिन सियासी तौर पर इसका फायदा उन्हें नहीं मिल पाता है. आसनसोल में दो साल पहले हुए सांप्रदायिक दंगों के दाग भी उन पर लगे थे. उन पर लोगों को उकसाने का आरोप लगा. दंगों के बाद मुसलमानों से मिलने तक नहीं गए थे और तब उनकी खूब आलोचना हुई थी.

वही बाबुल सुप्रियो एक बार फिर खबरों में हैं. कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्रों के एक समूह ने घेराव किया और उन्हें काले झंडे दिखाए. बाबुल सुप्रियो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक सेमिनार में हिस्सा लेने के लिए विश्वविद्यालय पहुंचे थे. लेकिन वामपंथी रुझान वाले संगठनों-आर्ट फैकल्टी स्टूडेंट्स यूनियन (एएफएसयू) और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के सदस्यों ने शुरुआत में बाबुल सुप्रियो वापस जाओ के नारे लगाते हुए करीब डेढ़ घंटे तक उनको कैंपस में प्रवेश करने से रोका. यूं बाबुल सुप्रियो ने आरोप लगाया कि उनके साथ धक्कामुक्की की गई और उनके बाल पकड़ कर खींचे गए. हालांकि दूसरा गुट बाबुल सुप्रियो पर ही हाथापाई का आरोप लगा रहा है. उस गुट का कहना है कि बाबुल सुप्रियो के साथ आए एबीवीपी के गुंडों ने छात्रों के साथ मारपीट की. बाबुल सुप्रियो उन्हें उकसा रहे थे. कुछ तसवीरों में बाबुल सुप्रियो के साथ धक्कामुक्की को देखा जा सकता है तो कुछ में उन्हें एक छात्रा को धक्का देते हुए देखा जा सकता है. उनके साथ घटी घटना ने ट्विटर पर भी ट्रेंड किया. बाद में एबीवीबी के छात्रों ने विश्विद्यालय छात्र संघ के कमरे में तोड़फोड़ की और आग लगा डाली.

शाम पांच बजे परिसर से बाहर निकलते समय भी भाजपा नेता को विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा. सूत्रों ने बताया कि वे काफी देर तक कैंपस में ही रूके रहे क्योंकि प्रदर्शनकारी छात्रों ने उनकी कार का रास्ता रोक दिया. भारी सुरक्षा के बीच सेमिनार में शिरकत करने वाले सुप्रियो ने कहा कि मैं यहां राजनीति करने नहीं आया हूं. विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों के व्यवहार से दुखी हूं, जिस तरह उन्होंने मेरा घेराव किया. उन्होंने मेरे बाल खींचे और मुझे धक्का दिया. बाबुल सुप्रियो को छात्रों ने देर तक रोके रखा और कहा जा रहा है कि बंगाल के राज्यपाल जगगीप धनकड़ खुद विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे और उन्हें निकाल कर ले गए. घटना का पता चलने पर विश्वविद्यालय के कुलपति सुरंजन दास ने प्रदर्शनकारी छात्रों से कारण जानने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने विश्वविद्यालय के गेट से हटने से इनकार कर दिया.

बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि बाबुल सुप्रियो का घेराव किया जाना एक गंभीर मुद्दा है. उन्होंने घटना के संबंध में राज्य के मुख्य सचिव को तुरंत कदम उठाने को कहा है. मुख्य सचिव मलय डे ने विश्वविद्यालय के कुलाधिपति राज्यपाल को आश्वस्त किया कि शहर के पुलिस आयुक्त को फौरन मामले पर गौर करने का निर्देश दिया है. एबीवीपी के छात्रों के तोड़फोड़ के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव है. दोनों गुट एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, इस धक्कामुक्की की वजह को लेकर अभी कई तथ्य सामने आने बाकी हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).

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