इंटरनेट डेस्क हमारी हिंदू संस्कृति में किसी भी तरह के शुभ अवसरों पर तरह – तरह के व्यंजन घरों में बनाए जाते है जिसको लेकर हम कई तरह की चीजों को इन व्यंजनों में शामिल करते है लेकिन स्वादिष्ट पकवानों को बनाने के बाद हमारी ललक इन्हे जल्दी से खाने के प्रति होती है लेकिन हमारे घर की बुजुर्ग महिलाए भगवान को भोग लगाए बिना किसी भी तरह के व्यंजन को खाने की अनुमाति नही देती है। क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है खुद की पेट पूजा से पहले आखिर भगवान को ही इन तरह –तरह के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है अगर नही तो इस लेख को जरुर पढ़े आपको अपने सारे सवालों के जवाब आसानी से मिल जाएगे।

अगर शास्त्रो की बात करें तो श्रीमद्भगवदगीता के तीसरे अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने वर्णित किया है कि जो व्यक्ति भगवान को भोग लगाएं बिना भोजन ग्रहण करता है उसे अन्न की चोरी का पाप भोगना होता है। ऐसा व्यक्ति उसी प्रकार दंड भोगता हैं जैसे किसी की वस्तु चुराने पर सजा मिलना।

और साथ ही शास्त्रों में भगवान के भोग को लेकर यह भी बताया गया है की जो व्यक्ति भगवान को भोग नहीं लगाते ऐसा करना भगवान के प्रसाद का अनादर माना गया है ऐसे में वह कभी सुखी जीवन को यापन नही कर सकते है।

भगवान को भोग लगाए बिना खुद भोजन कर उनकी राक्षसी प्रवृर्ति को दर्शाता है और ऐसे व्यक्ति जीवनभर कष्टों को भोगते है।

भगवान को सबसे पहले भोग लगाने से उनकी कृपा आप पर बनी रहती है। और आप हर तरह के कष्टों से मुक्त रहते है।

अगर आप भगवान को भोग लगाए तो हमेशा तांबे की वस्तु में भोग लगाना बेहद शुभ माना गया क्योकि इस पवित्र बर्तन और कोई नही है। इन बर्तनों में भगवान को भोग लगाने से उनकी कृपा आप पर हमेशा बनी रहती है।

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