इंटरनेट डेस्क: समलैंगिकता जिसे भारत ने मान्यता दे दी है, साथ ही कई सख्त निर्णय भी लिए गए है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए धारा 377 को खत्म करने का आदेश दिया है। तो वहीं अगर दुनिया की बात करें तो 25 से ज्यादा ऐसे देश हैं जहां समलैंगिकों की शादी को बहुत पहले ही मान्यता दे चुके है। दुनिया के कुछ प्रमुख देश की बात करें तो वर्ष 2003 में बेल्जियम ने ही समलैंगिकों के बीच शादी को अपने यहां कानूनी मान्यता दे दी थी। तो वहीं अमेरिका ने 2015 में, इंग्लैंड में वर्ष 2013 में कानूनी मान्यता दे दी गई थी। इसी तरह करीब 27 देशों में समलैंगिकों की शादी को मान्यता प्राप्त है। तो वहीं संयुक्त राष्ट्रसंघ के मुताबिक विश्व के 76 देशों में इसको लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं बना है।

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सुप्रिम कोर्ट के निर्णय से पहले भारत में भी आईपीसी की धारा 377 के तहत की बात करें तो 2 लोग आपसी सहमति या असहमति से अननैचुरल सेक्स करते हैं, और दोषी करार दिए जाते है तो ऐसे लोगों को 10 साल या उम्र भर की सजा हो सकती है। लेकिन अब ये कानून रद्द हो चुका है। पर इस आधुनिक युग में कुछ देशों ने समलैंगिकता को कानूनी मान्यता दे दी है तो कुछ देश इसके सख्त खिलाफ भी है।क्या है समलैंगिकता- समलैंगिकता को एक रोग कहा जा सकता है, जो प्रकृति के खिलाफ है। दुनियाभर में समलैंगिकता का ग्रॉफ बढऩे लगा है। हॉलीवुड और बॉलीवुड की फिल्में जहां इन्हें बढ़ावा दे रही है, तो वहीें कई देशों की सरकारे इन्हे कानूनी मान्यता देने मेें लगी है। वैसे अगर बात करें तो समलैंकिगता का मूल कारण खोजना जरूर है, वरना एक सभ्य समाज के समक्ष स्वस्थ रूप से जीने का संकट पैदा होने लगेगा।

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इस तरह के होते है लक्षण: समलैंगिकता के कारण पूरी तरह से अभी स्पष्ट नहीं हैं, फिर भी वैज्ञानिक जगत की बात करें तो मान्यता है कि आनुवंशिकी और जन्म से पूर्व गर्भ में हार्मोन की गड़बड़ी और वातावरण के प्रभाव के कारण भी इस माना जाता है। तो कुछ चिकित्सकों की बात करें तो इसे मानसिक रोग मानते हैं तो बहुत से इसे नहीं मानते है। वैज्ञानिकों का कहना यह भी है की ये केवल मनुष्यों में ही नहीं होता है बल्कि कई पशुओं में भी होता है, जैसे पेंग्विन, चिंपाजी और डॉल्फिन में ऐसे रोग पाया गया है। ऐसे में यह सभी प्राकृतिक गड़बड़ी या मानसिक विकारों का शिकार होते हैं।

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अगर हम समलैंगिकता के संबंध की कोई दूसरी वजह जाने तो इसके चलते सीधा.सा तर्क यह दिया जाता है कि यदि स्त्री या पुरुषों को सही दिशा में प्रेम नहीं मिला हो तो वे प्रेम के गलत रास्ते खोजने लगते है। इसके बाद जब गलत रास्तों पर चलने की उन्हे आदत होने लगती है तो वह सही रास्ते पसंद नहीं आते।

इसके कारण ये भी हो सकते है: जब एक पत्नी द्वारा अपने ही पति की उपेक्षा की जाना, इसके अलावा कुछ बचपन की गलतियां या आदत भी इसमें शामिल है। इसी तरह दो दोस्तों का इस कदर जुड़ जाना कि अलग होने का उन्हे कभी मन न हों। इसके अलावा सेक्स हार्मोन में परिवर्तन का होना भी एक कारण होता है।

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