बंगाल में सियासी पारा अचानक चढ़ गया. सियासी हत्याएं बंगाल के लिए कोई नई बात नहीं है. माकपा का शासन था तब भी सियासी हत्याएं होतीं थी. पहले कांग्रेस फिर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं और माकपा के बीच खूनी संघर्ष होता था और लोगों की जानें जातीं थीं. बंगाल में सत्ता बदली लेकिन खूनी संघर्ष जारी रहा. ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद माकपाइयों से झड़पें होतीं थीं, अब यह जगह भाजपा ने ले ली है. हालांकि पिछले कुछ महीनों से हिंसा की घटनाएं नहीं हो रहीं थीं. लेकिन अब मुर्शिदाबाद की घटना ने तूल पकड़ लिया है. सोशल मीडिया पर इसे हैशटैग के साथ तो चलाया ही जा रहा है, बंगाल सरकार को बर्खास्त करने की मुहिम भी ट्रेंड कराई जा रही है. बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने भी गंभीर चिंता जताई. इस मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है. लोगों का कहना है कि राज्यपाल ने तत्परता इसलिए दिखाई क्योंकि मारा जाने वाले लोगों का ताल्लुक आरएसएस से है. वर्ना हत्या की घटना ऐसी नहीं है जिसे लेकर राज्यपाल को चिंता जतानी पड़े.

मुर्शिदाबाद में एक परिवार के सभी तीन सदस्यों, जिनमें आठ साल का बच्चा और गर्भवती महिला शामिल है, को धारदार हथियारों से काट डाला गया. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी दी. पैंतीस साल के स्कूल शिक्षक बंधुप्रकाश पाल, उनकी तीस साल की गर्भवती पत्नी ब्यूटी और आठ साल के बेटे आंगन के शव जियागंज इलाके में स्थित उनके घर में अलग-अलग स्थानों से मंगलवार को बरामद हुए थे. घर में जगह-जगह खून फैला हुआ था.

इन हत्याओं ने उस समय सियासी रंग ले लिया, जब भारतीय जनता पार्टी और उसके वैचारिक संरक्षक माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा कि बंधुप्रकाश पाल आरएसएस के कार्यकर्ता थे. हालांकि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे उनके आरएसएस से जुड़ा होना साबित होता है. भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने विचलित करने वाले दृश्यों की चेतावनी देते हुए नृशंस तरीके से मारे गए इस परिवार के सदस्यों के शवों का एक वीडियो ट्वीट किया और लिखा कि इसने मेरी अंतरात्मा को हिलाकर रख दिया है. एक आरएसएस कार्यकर्ता बंधुप्रकाश पाल, उनकी आठ महीने की गर्भवती पत्नी और उनके बच्चे को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में क्रूरता से काट डाला गया.

पात्रा के मुताबिक उदारवादियों की ओर से एक शब्द भी नहीं कहा गया. 59 उदारवादियों की तरफ से ममता को एक खत भी नहीं. इस तरह कुछ खास घटनाओं पर ही प्रतिक्रिया दिए जाने से मुझे घिन आती है. हालांकि सोशल मीडिया पर यह पोस्ट आने के बाद संबित पात्रा से भी सवाल हुए कि वे ऊना की घटना पर विचलित हुए था या प्रतिक्रिया दी थी. लेकिन इसका जवाब संबित की तरफ से नहीं आया. भाजपा के छोटे से लेकर बड़े नेता ने तो इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या पर भी चुप्पी साधे रखी थी. लोगों ने पूछा कि सुबोध सिंह की हत्या पर अपनी और पार्टी नेताओं की चुप्पी पर संबित पात्रा आपको घिन आई थी.

यह परिवार छह साल पहले इस इलाके में रहने आया था. पुलिस का कहना है कि परिवार की सोमवार रात को अज्ञात शरारती तत्वों ने हत्या की. धारदार हथियार से की गई इन नृशंस हत्याओं से पूरा जिला सकते में है. हत्याओं की जानकारी तब मिली, जब विजयदशमी के पूजा पंडाल में परिवार के नहीं पहुंचने पर चिंतित पड़ोसियों ने उनके घर गए और दरवाज़े को भीतर से बंद पाया. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी फिर उसके बाद उनके शव बरामद हुए.

बंधुप्रकाश पाल के भाई सुजॉय घोष ने बताया कि बंधुप्रकाश बीस साल से प्राइमरी स्कूल शिक्षक थे और अपने बेटे की शिक्षा के लिए मुर्शिदाबाद शिफ्ट हुए थे. उन्होंने बताया कि हमें नहीं पता कि उन्हें किसी से भी कोई दिक्कत थी या नहीं. आरएसएस के पश्चिम बंगाल के सचिव जिष्णु बसु के मुताबिक बंधुप्रकाश पाल आरएसएस कार्यकर्ता थे, और हाल ही में एक साप्ताहिक मिलन (बैठक) से जुड़े रहे थे. लेकिन उनके भाई ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि मुर्शिदाबाद में हुई हत्याएं कोई पहली नहीं हैं. राज्य में इससे पहले भी भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याएं होती रही हैं. इससे बंगाल में क़ानून और व्यवस्था की बदहाल स्थिति का पता चलता है. राज्य में परिस्थिति बेहद तनावपूर्ण है. दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ज़िला समिति के एक नेता सुब्रत साहा का कहना है कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. हो सकता है कि हत्या की वजह निजी दुश्मनी हो. पुलिस की जांच में सब कुछ सामने आ जाएगा.

लालबाग के सब-डिवीजनल पुलिस अधिकारी बरुण वैद्या के मुताबिक इस मामले की जांच की जा रही है. लेकिन अब तक हत्या के मक़सद का सुराग नहीं मिल सका है. हमने पाल के परिजनों और पड़ोसियों से बात की है. वैद्या बताते हैं कि पाल के घर के भीतर कई सामान बिखरे पड़े थे. इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि हत्यारों के साथ उनकी हाथापाई हुई हो. फ़िलहाल पुलिस प्रकाश पाल के मोबाइल की कॉल डिटेल निकालकर जांच कर रही है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि पाल परिवार के हत्यारे उनसे पहले से परिचित थे. इस हत्याकांड से पड़ोसी भी सदमे में हैं. प्रकाश के एक पड़ोसी विपुल सरदार बताते हैं कि यह परिवार बेहद सभ्य और शिक्षित था. उसका आज तक किसी पड़ोसी से कोई विवाद नहीं हुआ था.

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को टैग करते हुए ट्वीट किया कि भयावह भयावह अपराध, और इससे भी बुरा यह है कि प्रशासन की ओर से ऐसी वारदात रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया. मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और डीजीपी को खत लिख रही हूं, हालांकि जहां तक पश्चिम बंगाल का सवाल है, यह बत्तख की पीठ पर पानी डालने जैसा है. यानी रेखा शर्मा ने भी संवेदना के बहाने सियासत ही ज्यादा की. उनका ताल्लुक भी भाजपा से है इसलिए बंगाल की हत्या को सियासी रंग देने में उन्होंने देर नहीं लगाई. इन हत्याओं से मामला गरमा गया है. आगे-आगे देखिए होता है क्या. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).

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