यह बात किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि कूलर और एयर कंडीशनर उपलब्ध होने के बावजूद भी घरों-दफ्तरों आदि में पंखों का इस्तेमाल अभी खत्म नहीं हुआ है। इसी क्रम में अन्य स्थानों की तरह भारतीय संसद में भी पंखे लगे हुए हैं, लेकिन इस भवन में जिस तरह से पंखें लगे हैं, वैसे आपने कहीं नहीं देखें होंगे। अब आप सोच रहे होंगे कि इन पंखों में ऐसी क्या खास बात है।

दरअसल संसद भवन में पंखे उल्टे लगे हुए हैं। जी हां, देश की ऐतिहासिक इमारतों में से एक संसद भवन 6 साल में बनकर तैयार हुआ था। इसे बनाने में उन दिनों 83 लाख रुपए खर्च हुए थे। मशहूर वास्तुविद लुटियन ने संसद भवन को डिजाइन किया था। बता दें कि संसद भवन के सेन्ट्रल हॉल में देश की दशा और दिशा तय की जाती है। भारत के भविष्य से जुड़े हर फैसले यहीं लिए जाते हैं।

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खैर जो भी हो, अब सवाल यह उठता है कि आखिर संसद भवन में लगे पंखे छतों पर नहीं बल्कि जमीन से ऊपर की ओर उल्टे क्यों लगे होते हैं। बता दें कि संसद भवन की नींव 1921 में रखी गई थी, उन दिनों एयर कंडीशनर तो थे नहीं, ऐसे में संसद में पंखे लगाने थे। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह थी कि संसद भवन का गुम्बद इतना ऊंचा है कि वहां पंखे की हवा इतने नीचे तक नहीं लायी जा सकती थी।

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डंडा भी बहुत ज्यादा लंबा लगना होगा और ये उतना कारगर होगा नहीं, इसलिए संसद भवन में पंखे उल्टे ही लगा दिए गए ताकि हवा पास से ही सांसदों तक आती रहे। संसद की ऐतिहासिकता बनाए रखने के लिए इन पंखों को पहले की तरह ही लगे रहने दिया गया। संसद भवन में की गई कलाकारी इसे विश्व में अनोखा बनाती है।

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