मुझे अपने बच्चे के लिए टिफिन बॉक्स चाहिए था जिसमे खाना गर्म रहे मैंने कई ऑनलाइन कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर खोजना शुरू किया अलग -अलग वेबसाइट पर एक ही सामान के अलग -अलग रेट है अपना कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए मैंने अपने दोस्त को फ़ोन किया जो कभी ई -कॉमर्स कंपनी में काम करता था उसने मुझे जो बाते बताई वह आप तक पहुंचना जरुरी है

देश में अमेज़न, फ्लिपकार्ट, क्लब फैक्टी, शॉपक्लूज़ जैसी कई ई -कॉमर्स कंपनियां है इनकी वेबसाइट पर अपना सामान डालने के लिए सेलर्स को रजिस्टर्ड करना होता है जिसका ये कंपनियां चार्ज लेती है जब सेलर्स किसी चीज की कीमत तय करता है तो वह तरह के चार्जेज को भी ध्यान में रखता है

सैलर्स ने कितना सामान बेचा इस पर भी ई -कॉमर्स कंपनियां उसका कमीशन तय करती है आमतौर पर यह सेलर्स के कुल सेल्स या नेट सेल्स की वेल्यू तय होता है जिनका नेट सेल्स अच्छा होता है उसको ई -कॉमर्स कंपनी ज्यादा कमीशन देती है इस कमीशन से होने वाली कमाई का एक हिस्सा सेलर्स ग्राहकों को दे देता है

हर कोई इस तरह के बिजनेस में पैसा बनाना चाहता है फिर चाहे वह खरीददार ही क्यों न हो खरीददार को जिस वेबसाइट पर कम कीमत में सामान मिलता है वहीँ से खरीद लेता है वैसे भी सेलर्स कोई सामान नहीं बनता ,सामान तो कंपनी बनती है गारंटी भी कंपनी देती है


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