महाभारत की कथा के अनुसार हस्तिनापुर के राज परिवार में कुंती, गांधारी और द्रौपदी जैसी महान स्त्रीयां कुलवधू रही है, परंतु इस परिवार में एक स्त्री ऐसी थी, जिसका बलिदान सबसे बड़ा था। वह इस परिवार की कुलवधू होते हुए भी हस्तिनापुर में रहती नहीं थी। उस स्त्री का नाम हिडिम्बा था।

महाभारत की कथा के अनुसार कई बार दुर्योधन ने पांडवों की हत्या का षडयंत्र रचा परंतु वह निष्फल रहा। लेकिन अपनी जान बचते हुए पांडवों वहां से दैत्य वन की तरफ चले गए। उस वन में हिडिम्ब नाम का एक दैत्य अपनी बहन हिडिम्बा के साथ निवास करता था। हिडिम्ब राक्षस को वन में मनुष्यों की दुर्गन्ध आ गई और उसने अपने बहन को उन मनुष्यों को भोजन के लिए उठाकर ले आने का आदेश दिया।

अपने भाई का आदेश मानकर हिडिम्बा वहां पर गई; जहाँ पर चार पांडव अपनी माता के साथ विश्राम कर रहे थे। महाबली भीम उन सब की रक्षा कर रहे थे। भीम को देखकर हिडिम्बा उस पर मोहित हो गई और उसने भीम के समक्ष प्रेम प्रस्ताव रख दिया।

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उसी समय वहां पर हिडिम्ब राक्षस आ गया और अपनी बहन को भीम के साथ देखकर क्रोधित हो गया। उस राक्षस ने अपनी बहन को भला-बुरा कहा और पांडवों को मारने का प्रयास किया। उस समय भीम और हिडिम्ब का युद्ध हुआ, जिसमें हिडिम्ब मारा गया। उस समय हिडिम्बा ने माता कुंती से प्राथना की कि मैं आप के पुत्र भीम से प्रेम करती हूँ और मैंने भीम को पति रूप में स्वीकार किया है, इसलिए आप मुझे अपनी पुत्रवधू स्वीकार कर लीजिये।

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हिडिम्बा की बात सुनकर कुंती ने हिडिम्बा को पुत्रवधू के रूप में स्वीकार कर लिया परंतु साथ में यह शर्त भी रख दी कि भीम और हिडिम्बा का जो पुत्र होगा; उसका हस्तिनापुर के उपर कोई अधिकार नहीं होगा। उसके बाद भीम और हिडिम्बा साथ रहने लगे, हिडिम्बा ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम घटोत्कच रखा गया।

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