मोटर वाहन अधिनियम 1988 के मुताबिक, देश में सभी वाहनों पर रजिस्टर्ड नम्बर प्लेट लगाना अनिवार्य है। विक्रेता वाहन की बिक्री के समय एक अस्थायी रजिस्टर्ड नम्बर जारी करता है जो कि 30 दिनों के लिए मान्य होती है। वाहन के मालिक को इस समय में स्थानीय परिवहन कार्यालय में अपने वाहन को रजिस्टर्ड करवाना होता है। कुछ सरकारी कार्यालयों को छोड़कर देश में हर व्यक्ति को यह प्रक्रिया करनी होती है।

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बता दें कि भारत में जहां लगभग सभी वाहनों पर सामने और पीछे एक नंबर एक प्लेट होती हैं वहीँ कुछ सरकारी वाहनों पर इसके बजाय राष्ट्रीय प्रतीक होता हैं। अब एक सवाल यह उठता है कि उन्हें यह विशेषाधिकार क्यों दिया गया है।

वर्तमान प्रोटोकॉल भारत के विदेश मंत्रालय को उन कारों का उपयोग करने की इजाजत देता है जिनपर नम्बर प्लेट की बजाय राष्ट्रीय प्रतीक होते है। मंत्रालय इन कारों का उपयोग विदेशी अधिकारियों और भारत के गणमान्य व्यक्तियों को लाने-ले जाने के लिए करता है। इसलिए कई लोग इस विशेषाधिकार का कारण विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल मानते हैं।

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लेकिन पिछले कई सालों से, भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सभी भारतीय राज्यों के राजयपाल और कुछ अन्य लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले वाहन नम्बर प्लेट के अनिवार्य उपयोग से मुक्त रहे है और इसके बजाय राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल करते है। इसके बाद कई राजनितिक पार्टियां भी इस तरह से वाहनों का उपयोग करने लगी है।

हालाँकि भारत सरकार इस तरह के एक विशेषाधिकार लाल बत्ती से छुटकारा पा लिया है और अब शायद नंबर प्लेट की जगह राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल करना अगला हो सकता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाहन पर पहले ही नंबर प्लेट है।

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