बाबर से लेकर अकबर तक मुगल सम्राटों को काफी मजहबी और कुशल शासक माना जाता है लेकिन इसी मुगलिया सल्नत के वारिस शाहजहाँ को एक विलासी और विकृत यौन इच्छाओं वाला शासक माना जाता है, शाहजहाँ की तेरह पत्नियों के अलावा उसके हरम में 8000 औरतें भी थी जिनके साथ वो अपनी इच्छाओं के मुताबिक़ भोग-विलास करता था।

शाहजहाँ अपनी कामुकता के लिए इतना कुख्यात था, की कई इतिहासकारों ने उसे अपनी सगी बेटी जहाँआरा के साथ भी सम्भोग करने का दोषी माना है।इतिहासकार फ्रांसिस वर्नियर ने लिखा है कि शाहजहाँ और मुमताज महल की बड़ी बेटी जहाँआरा बिल्कुल अपनी माँ की तरह लगती थी। इसीलिए मुमताज की मृत्यु के बाद शाहजहाँ ने अपनी ही बेटी जहाँआरा को फंसाकर भोगना शुरू कर दिया था।

अकबर ने यह नियम बना दिया था, की मुगलिया खानदान की बेटियों की शादी नहीं होगी। इसका परिणाम यह होता था, की मुग़ल खानदान की लड़कियां अपने जिस्मानी भूख मिटाने के लिए अवैध तरीके से दरबारी, नौकर के साथ साथ, रिश्तेदार यहाँ तक की सगे सम्बन्धियों का भी सहारा लेती थी .कहा जाता है कि एकबार जहाँआरा जब अपने एक नौकर के साथ संभोगरत थी तो कामातुर शाहजहाँ अचानक उसके कमरे में आ धमका जिससे डरकर वह नौकर हरम के तंदूर में छिप गया, शाहजहाँ ने तंदूर में आग लगवा दी और उसे जिन्दा जला दिया।। शाहजहाँ की मृत्यु आगरे के किले में ही 22 जनवरी 1666 को हो गई. द हिस्ट्री चैनल के अनुसार शाहजहाँ की मौत अत्यधिक कमोत्तेजक दवाएँ खा लेने का कारण हुई थी।


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