बीठुर नामक स्थान का इतिहास में ही नहीं बल्कि यह स्थान हिन्दू धर्म में भी काफी महत्व रखता है यह शहर उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले कानपूर शहर से मात्र 22 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है यहां की धरती पर कदम रखते ही आपको चारो तरफ प्रकृतिक खूबसूरती और हरियाली नजर आएगी यहां कई मंदिर और इमारतें भी देखने योग्य है

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान राम जब रावण से वध कर 14 वर्ष के वनवास से लोटे तो लोगो ने उनकी देवी सीता की पवित्रता की लेकर कान भरने शुरू कर दिए लोगो की शंकाओ और आलोचनाओं के समाधान के तौर पर भगवान राम ने देवी सीता का त्याग कर दिया पति के त्यागने के बाद देवी सीता ने अपने मायके जनकपुरी जाने की जगह आश्रम का साधवी वाला जीवन जीना पसंद किया और वह बिठूर स्थित संत वाल्मीकि आश्रम आ गई

बिठूर को सन 1857 के ऐतिहासिक प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र माना जाता है यह वहीं स्थान है जहां झांसी की रानी लक्ष्मी बाई का बचपन बीता था आपको जानकर हैरानी होगी कि टोपे परिवार कि एक पीढ़ी आज भी बैरकपुर में रहती है कहा जाता है कि बिठूर ही वह स्थान है जहां भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि कि रचना कि थी बिठूर को 52 घाटों कि नगरी कहा जाता है मगर गंगा नदी के किनारे बसे इस गांव में केवल 30 घाट ही बचे है


यहां संत वाल्मीकि आश्रम भी है यहां पर साल लाखों लोग विजिट करने आते है यहां पर सीता जी कि रसोई और उनके बर्तन देखने को भी मिलते है पाथर घाट लाल पत्थरों से बना हुआ है इस घाट को अवध के मंत्री टिकैत राय ने बनवाया था घाट के निकट ही एक विशाल शिव मंदिर है जहां कसौटी पत्थर से बना शिवलिंग स्थापित किया गया है धुर्व टीला बिठूर का सबसे खूबसूरत स्थान है कहा जाता है यहां बालक ध्रुव ने एक पैर पर खड़े होकर तपस्या कि थी ध्रुव कि तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे एक दैवीय टारे के रूप में सदैव चमकने का वरदान दिया था


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