कुछ लोगों का कहना है कि महाभारत को गीता के उपदेश सिर्फ लोगों के मन की बनायीं बाते थीं । पर लगातार मिलते गए पुरातात्विक और वैज्ञानिक सबूतों ने लोगों को अपनी सोच बदलने पर मजबूर कर दिए है आज हम महाभारत से जुड़े 10 ऐसे ही सबूतों को देखेंगे उसके बाद निर्णय आपका होगा कि क्या महाभारत सच में हुआ था।

1. खगोल शाश्त्र के सन्दर्भ –

महाभारत का उद्योग पर्व बताता है कि महाभारत के युद्ध से ठीक पहले भगवान् श्री कृष्ण हस्तिनापुर गए थे । जब चन्द्रमा रेवती के नक्षत्र में था हस्तिनापुर जाते समय कृष्ण भगवान् ने रस्ते में एक जगह रूक कर विश्राम किया था जिस जगह का नाम वृक्षथला था। और उस दिन चन्द्रमा भरानी नक्षत्र में था जिस दिन दुर्योधन ने कृष्ण भगवान् के सारे प्रयासों को नजरअंदाज़ करके रुख मोड़ लिया था। तब उस समय चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में था Indian Astronomical calculation से हम उस समय की घटनाओ की dates तक का पता लगा चुके हैं जिस दिन वो सब घटनाएँ घटी थी।

2. कुरुक्षेत्र –

यह बात तो हम सभी जानते हैं कि महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र मे हुआ था जो आज भी हरियाणा राज्य में स्थित है। कहा जाता है कि उस समय तबाही ला देने वाले युद्ध में बहे खून की वजह से वहां की धरती लाल हो गयी थी। पुरातात्विक विशेषज्ञ ने माना है कि महाभारत घटना सच में घटी थी क्योंकि उस जगह पर लोहे से बने तीरों और भालों को जमीन में गढ़ा पाया गया है। जिनकी जाँच पड़ताल करने पर उन्हें 2800 ई.पू का माना गया है जो कि लगभग महाभारत के समय काल के ही बने हुए हैं।

3. आज के nuclear weapon –

महाभारत में आपने ब्रह्मास्त्र नाम के भयानक अस्त्र के बारे में तो सुना ही होगा। यह अस्त्र धर्म और सत्य को बनाये रखने के लिए ब्रह्मा द्वारा बनाया गया एक बहुत ही विनाशकारी परमाणु हथियार था। माना जाता है कि यह अचूक और बह्यंकर अस्त्र होता था। जिसे केवल दूसरा ब्रह्मास्त्र ही रोक सकता है और जो इसको छोड़ता है वही इसको वापस लेने की क्षमता भी रखता है। रामायण में भी लक्षमण ने जब मेघनाद पर ब्रह्मास्त्र से प्रहार करना चाहा तो भगवान् श्रीराम ने लक्ष्मण को यह कहकर रोक दिया कि अभी इसका उपयोग करना सही नहीं क्योंकि इस से सारी लंका तबाह हो जाएगी और बेकसूरों को जान जाएगी। इस प्रकार यह अस्त्र रामायण और महाभारत के काल में किसी गिने चुने योधाओं के पास ही होता था। रामायण में यह अस्त्र लक्षम्ण और विभीषण के पास था। और महाभारत में यह द्रोणाचार्य, अश्वथामा, कृष्णा, युधिस्ठिर, कर्ण, प्रद्युमन और अर्जुन के पास था। यह अस्त्र पूरी दुनिया को तबाह करने की ताकत रखते हैं अब आप सोच रहे होंगे कि मैं आपको यह क्यों बता रहा हूँ। तो बता ही देता हूँ क्योंकि आधुनिक काल में J Robert Oppenheimer ने गीता और महाभारत का बहुत गहरा अध्ययन किया और गौरतलब है। कि अमेरिका ने इसी वैज्ञानिक J Robert Oppenheimer को परमाणु बम बनाने का काम दिया था उन्होंने महाभारत काल के ब्रह्मास्त्र अस्त्र की संघारक क्षमता पर शोध किया और अपने Mission को नाम दिया Trinity।


4. महाभारत को छंदों में लिखा गया है –

यह कहना बिलकुल भी गलत होगा कि महाभारत में लिखे गए लेख काल्पनिक हैं। ऐसा लोग इसलिए सोचते हैं क्योंकि उन्हें लिखे जाने का तरीका एक कविता की तरह है। और उन्हें पढने पर वो एक कविता जैसे लगते हैं पर उस समय यह रिवाज था कि हर चीज को हर चीज को कविता के ही तरीके से लिखा जाता था। यहाँ तक कि गणित यानी Mathematics के formulas को भी कविता की तरह लिखा गया था।

5. अंगदेश का प्रमाण –

कुंती के सबसे बड़े बेटे दानवीर कर्ण अंग देश के राजा थे। जो उनको दुर्योधन द्वारा उपहार स्वरुप भेंट किया गया था उस समय का अंगदेश आज उत्तर प्रदेश में गोंडा जिले के नाम से जाना जाता है। साथ ही जरासंध द्वारा अपने राज्य के कुछ हिस्सों को कर्ण को दिए जाने की बात भी कही जाती है जो आज बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिले के नाम से जाने जाते हैं। वही जिसको हम आज दिल्ली कहते हैं वह महाभारत के समय में इन्द्रप्रस्थ के नाम से जानी जाती थी तो ये स्थान तो काल्पनिक नहीं है सैकड़ो स्थान तो ऐसे भी हैं जिनका नाम महाभारत के वक़्त भी वही थे जो अब हैं जैसे द्वारका, कुरुक्षेत्र, बरनावा, हिडिम्बा आदि ।

6. चक्रव्यूह पत्थर –

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के सोलह सिंगी धार के नीचे बसा राजनौण गांव एक ऐतिहासिक स्थल के नाम से मशहूर है।प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, पांडव अज्ञातवास के दौरान यहां रुके थे। अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने यहां पर चक्रव्यूह का ज्ञान प्राप्त करने पर उसे पत्थर पर उकेरा,जो आज भी मौजूद है। इस चक्रव्यूह को ध्यान से देखा जाए तो इसमें अंदर जाने का रास्ता तो साफ दिखाई देता है लेकिन बाहर जाने का रास्ते का पता नहीं चलता। एक खंडहरनुमा महल के पास यह चक्रव्यूह मौजूद है, जिसे पिपलु किले के नाम से जाना जाता है। अर्जुन ने यहाँ अपने बाकि भाइयों को चक्रव्यूह सिखाया था ।

7. लाक्षागृह –

महाभारत में ‘लाक्षागृह’ की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। कौरवों ने लाख से इसको बनवाया था और इसमें पांडवों को जिंदा जलाने की साजिश रची गई थी, लेकिन सुरंग के माध्यम से पांडवों ने निकलकर अपनी जान बचाई थी। यह वार्णावत (वर्तमान बरनावा) नामक स्थान में बनाया गया था।

8. श्रीमद्भगवद्गीता –

जिन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ी होगी उन्हें अच्छी तरह पता होगा कि उसमें अधिकांश श्लोक सिर्फ दो दो लाइनो में लिखे गए हैं।और अगर आप किसी भी एक श्लोक को पढ़ें समझे तो ये श्लोक बहुत कम शब्दों में और बहुत अधिक बात कह देते हैं मानो गागर में सागर। और जितनी गहरी बाते उसमें लिखी गयी हैं ये बाते किसी सामान्य मनुष्य द्वारा बिलकुल नहीं बताई जा सकती। आज मानव सभ्यता बहुत विकसित हो चुकी हिया लेकिन आज भी गीता में जो ज्ञान है वो अकल्पनीय और अद्वितीय है जिसे एक सामान्य व्यक्ति का दिमाग नहीं सोच सकता कोई महान पुरुष या भगवान् ही कह सकता है। और यह इस बात का सबूत है कि भगवान् श्रीकृष्ण थे और उन्होंने गीता का वाद संवाद अर्जुन के साथ किया तो इसलिए अर्जुन भी थे, और अर्जुन थे तो फिर पांडव भी थे, और पांडव थे तो फिर महाभारत भी हुआ था ।

9. द्वारका नगरी –

इस बात से तो हम सभी परिचित है हैं भगवान् श्री कृष्ण द्वारका के राजा थे। और महाभारत में इस बात का उल्लेख मिलता है की यह मगरी जलनग्न हो गयी थी। पुरातत्व विभाग को गुजरात के पास समुद्र के नीचे एक पुराना शहर मिला है और इसके प्रमाणों से पता चलता है कि यह वही द्वारका नगरी है। जिसका उल्लेक महाभारत में किया गया है समुद्र में मिले इस अवशेष से यह साबित होता है कि द्वारका कोई काल्पनिक शहर नहीं बल्कि एक वास्तविक शहर है ।

10. विशाल राजवंश –

महाभारत का राजवंश राजा मनु से शुरू होता है और इस ग्रन्थ में 50 से भी ज्यादा वंशो का वर्णन किया गया है। धृतराष्ट्र और पांडू भी इसी वंश के थे अगर महाभारत मात्र एक कथा होती तो लेखक सिर्फ 5 या 10 ही राजवंशो का वर्णन कर पाता या अगर वो बुद्धिमान होता तो 15 वंशो का वर्णन करता चलो मान ले की वह 20 वंशो का ही वर्णन करता मगर यहाँ तो 50 से ज्यादा राजवंशो का वर्णन किया गया है। और इतने राजवंशो की कहानी और उनको एक किताब में समेटना एक काल्पनिक कहानी के आधार से बिलकुल भी सम्भव् नहीं है ।

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