इंटरनेट डेस्क : चैत्र नवरात्र का पावन पर्व चल रहा है जो हमारे हिंदू धर्म में एक विशेष महत्व रखता है चैत्र नवरात्रि का सांतवा दिन मां कालरात्रि का समर्पित दिन है मां दुर्गा का सांतवा स्वरुप मां कालरात्रि है मां कालरात्रि व्यक्ति के ऊपर रहने वाले हर बुरें प्रकोप को दूर करती है इनके स्मरण मात्र से ही भूत-पिशाच, भय और अन्य सभी तरह की परेशानी दूर होती है। मां कालरात्रि की पूजा से आपके ऊपर रहने वाली हर बुरी बला के प्रकोप को कम किया जा सकता है।

आइए जानते है मां कालरात्रि से जुड़ी ये विशेष बातें ..

दुर्गा का सातवां रूप है मां कालरात्रि असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के बाद मां कालरात्रि के रुप में उत्पन्न हुई मां कालरात्रि की पूजा करने से हर बुरें करने वाले का नाश होता है और पूजा पाठ करने से घर में सुख-समृध्दि बनी रहती है।

मां कालरात्रि की पूजा में इन विशेष बातों का ख्याल रखना आपको जरुरी है...

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मां की पूजा जब भी आप करें तो लाल रंग के कपड़ें पहने जिन लोगों की मकर और कुंभ राशि है उन लोगों को मां कालरात्रि की पूजा अवश्य करनी चाहिए। ऐसा करना इन राशि वाले लोगों के लिए फलदायी होगा।

अगर जीवन में कोई परेशानी चल रही है तो सात या सौ नींबू की माला देवी को चढ़ाएं।

सप्तमी के दिन रात्रि में तिल या सरसों के तेल से अखंड ज्योत माता के सामनें जलाएं । ऐसा करना लाभकारी होगा।

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चलिए जानते है मां कालरात्रि की इस विशेष कथा के बारे में जो आपने पहले नही सुनी होगी...

जब असुरों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखी थी और इससे सभी लोग बेहद परेशान थे और इस परेशानी को दूर करने के लिए देवतागण मां दुर्गा के पास गएं तभी भगवान शिव ने मां दुर्गा से सभी भक्तों की रक्षा करने के लिए कहा। तब मां दुर्गा ने अन्य रूप धारण कर असुर रक्तबीज का वध किया। मां दुर्गा के इसी रूप को मां कालरात्रि कहा के नाम से जाना है । नवरात्र के दिनों में मां कालरात्रि की पूजा करने से हर बुरें प्रभाव से खुद को बचाया जा सकता है।

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