आजकल वजन कम करने के लिए लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रहे हैं यह इसलिए भी काफी प्रचलित हो रहा है क्योंकि इसके लिए डाइटिंग से ज्यादा एक तरह से लाइफस्टाइल में बदलाव है।

शोध की मानें तो यह वजन कम करने के अलावा हमारी सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को भी दूर रखता है लेकिन यह देखने में जितना आसान होता है उतना है नहीं थोड़ी सी भी गलती से इसका प्रभाव नजर नहीं आएगा और वजन कम करने में भी बेअसर हो जाएगी।

इंटरमिटेंट फास्टिंग तब होती है जब कोई व्यक्ति अपना वजन कम करना चाहता है और उपवास और खाने के पीरियड के बीच 16 घंटे की साइकिल होती है जिसमें यह तय किया जाता है कि कब खाना है ,इसमें क्यों खाना है यह मायने नहीं रखता।

लेकिन अगर समय में लापरवाही की तो इसका असर कम हो सकता है कई लोग गेप के दौरान हाई कैलोरी फूड खाने लगते हैं जिससे फास्टिंग का मतलब नहीं रह जाता है अगर आप भोजन में अनहेल्थी और तला भुना भोजन करेंगे तो आपको इंटरमिटेंट फास्टिंग का कोई फायदा नहीं होगा।


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