लौहगढ़ का किला भारत का एकमात्र अजेय दुर्ग कहा जाता है क्योकि इसे कभी कोई नहीं जीत पाया इतना ही नहीं अंग्रेजो ने भी इस किले से हार मान ली थी |

इस किले का निर्माण 285 साल पहले यानी 19 फरवरी 1733 को जाट शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था इस किले को बनाने के एक विशेष तरह का पयोग किया गया था |

जिससे की बारूद के गोले भी किले की दीवार से टकराकर बेअसर हो जाये उस समय तोप और बारूद का प्रचलन काफी ज्यादा था इस किले के निर्माण के वक्त एक चौड़ी और मजबूत दीवार बनाई गई |

इन पर टोपी के गोले का असर नहीं हो इसके लिए इन दीवारों के चारो और सैकड़ो फुट चौड़ी कच्ची मिट्टी की दीवार बनाई गई और निचे गहरी और चौड़ी खाई बनाकर उसमे पानी भरा गया कहते ै इस किले पर कब्जा जमाने के लिए अंग्रेजो ने 13 बार आक्रमण किया था |

अंग्रेजी सेना ने यहां सैकड़ो तोप के गोले बरसाए थे लेकिन उन गोलों का किले पर कोई असर नहीं हुआ अंग्रेजो की सेना बार बार हारने से हताश हो गई तो वहा से चली गई |


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