इंटरनेट डेस्क : हमारी हिंदू संस्कृति में कई तरह के शादी समारोह के खास मौकों पर नथ पहनने का रिवाज माना गया है यहां तक की दुल्हन की शादी के वक्त उसे नथ पहनने सबसे ज्यादा जरुरी है जो हमारी संस्कृति में एक खास पहचान रखती है। नथ दुल्हनों के सोलह श्रृंगारों में शामिल की गई है। जिसे पहनने के पीछें यह खास इतिहास है। 9वीं और 10वीं सदी में नथ पहनने का प्रचलन महिलाओं मे सबसे ज्यादा देखा गया है यह एक वैवाहिक स्त्री का प्रतीक मानी गई है। और इसे उसका श्रृंगार एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है

राजसी परिवार की महिलाए अक्सर मोती, नीलम और कुंदन जडित स्वर्ण नथ को पहना करती थी जिसे पहनने के बाद उनका खूबसूरती और भी बढ़ती हुई दिखाई देंती थी। लेकिन आज नथ फैशन का एक खास हिस्सा बन गई है जिसें हर कोई अपने फैशनेबल स्टाइल में डिफरेंट आइडिया से पहनता हुआ दिखाई दें रहा है।

भारतीय संस्कृति की बात करें तो हर संस्कृति की महिलाएं अलग-अलग तरह के नथों को पहनती है। महाराष्ट्र में महिलाए बड़े आकार की नथ पहनती हैं, जो उनके चेहरे एक पार्श्व पर पूरी फैली रहती है। बंगाली स्त्रियाँ नासिका का पट छिदवा कर नथ पहनना पसंद करती हैं।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में कुमायूँनी और गढ़वाली स्त्रियाँ विशेष तौर पर अपनी शादी के दिन अलंकृत स्वर्ण नथ पहना करती है। अगर नथ में खूबसूरती की बात हो तो गढ़वाल की ‘टिहरी नथ’ की सुन्दरता सबसे अलग है, जिसे देख कर लोग आश्चचर्यचकित रह जाते हैं। छोटे आकार की कुमायूँनी नथ की तुलना में गढ़वाली नथ काफी बड़ी होती हैं। इन्हें स्वर्ण से ढाला जाता है और ये प्रायः रूपांकन, मयूर और फूलों के खूबसूरत डिजाइर से तैयार की जाती है।

फैशन की बात करें तो हर तरह की नथ इन दिनों मॉर्केट में छाई हुई जिसकी खूबसूरत आकर्षक कारीगरी हर किसी को बेहद पसंद आती है। बड़ी छोटी हर तरह के साइज में ये नथ मिल जाती है।

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