नमस्कार मित्रों आज आपका फिर से एक बार स्वागत है एक नए लेख में, दोस्तों आप सभी लोगों ने तो गीता ज्ञान जरुर पड़ी होगी या सुनी होगी भगवान श्री कृष्ण ने गीता में परमात्मा और आत्मा के बारे में अच्छी तरह से जानकारी दी है बता दें गीता एक ऐसी ग्रंथ है जो समय से परे मानी जाती है जिसका न कभी अंत है और ना कभी अंत होगा क्योंकि वह सर्वदा सत्य है आज हम आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण के अनुसार बताए गए चोर व्यक्ति के लक्षण के बारे में बताने जा रहे हैं।

दोस्तों गीता का ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में दिया था जब अर्जुन माया मोह में पड़ गया था और अपने ही परिवार जनों का वध करने से पीछे हट रहा था तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को आत्मा और परमात्मा के रहस्य में गुड़ जानकारी देते तो चलिए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण ने किस प्रकार के मनुष्य को चोर कहा है।

भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो व्यक्ति यज्ञ करता है और उस यज्ञ से स्वयं अपने आप ही भोग करता है वह व्यक्ति चोर के समान होता है जो व्यक्ति यज्ञ से देवताओं को प्रसन्न नहीं करता और उनको बिना दिए ही उसके वो को स्वयं भोक्ता है वह व्यक्ति निश्चित ही चोर होता है।

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Source: amarujala.com

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