नमस्कार मित्रों आज आपका फिर से एक बार स्वागत है एक नए लेख में, दोस्तों महाभारत कहानी के बारे में तो आप लोगों ने जरूर पढ़ा या सुना होगा। महाभारत में बताया गया है की अर्जुन से बड़ा धनुर्धर कोई नहीं था। दोस्तों कहा जाता है यदि अर्जुन के पास धनुष चलाने का कौशल नहीं होता तो शायद ही महाभारत युद्ध को पांडव जीत सके रहते। दोस्तों यह बात तो आप सभी लोग जानते होंगे कि जब सभी पांडव स्वर्ग जा रहे थे तभी उनकी मृत्यु हुई थी। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि अर्जुन की मृत्यु स्वर्ग जाने के पहले भी हो चुकी थी।

दोस्तों महाभारत में एक ऐसा कथा का वर्णन मिलता है जिसमें अर्जुन के पुत्र ने ही अपने पिता का वध कर डाला और अर्जुन की मृत्यु पर देवी गंगा मुस्कुराने लगी थी। दोस्तों कथा के अनुसार जब महाभारत का युद्ध खत्म हुआ तब युधिष्ठिर को हस्तिनापुर का राजा बना दिया गया और कुछ दिन पश्चात भगवान श्री कृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने अश्व यज्ञ आरंभ किया और नियमानुसार यज्ञ को अर्जुन के नेतृत्व में छोड़ दिया गया। जहां-जहां अश्व जाता अर्जुन अपनी सेना के साथ उसके पीछे पीछे जाते। दोस्तों यज्ञ का अश्व कई राज्यों से गुजरा जिसमें कई राजाओं ने तो अर्जुन से युद्ध करने से मना कर दिया और जिसने भी अर्जुन से युद्ध क्या वह अर्जुन से हार गया

दोस्तों इसी क्रम में यज्ञ का घोड़ा मणिपुर पहुंचता है जहां पर अर्जुन का पुत्र बब्रुवाहन राज्य करता था। जब अर्जुन के पुत्र बब्रुवाहन को पता चलता है कि उसके पिता उसके राज्य में आए हैं, तब वह अपने पिता के स्वागत के लिए राज्य की सीमा पर पहुंचता है लेकिन राज्य की सीमा पर अर्जुन अपने पुत्र से कहता है कि अभी मैं हस्तिनापुर का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं इसलिए तुम्हें नियमानुसार मुझ से युद्ध करना होगा।

उसके बाद अर्जुन और बब्रुवाहन के बीच एक भयंकर युद्ध चलता है और कुछ समय बाद बब्रुवाहन दिव्य अस्त्र से अपने पिता अर्जुन का सिर धड़ से अलग कर देता है। जब यह बात भगवान श्री कृष्ण और माता कुंती को पता चलता है तब दोनों मणिपुर पहुंचते हैं और यह देखकर दोनों को धक्का लगता है, तभी वहां पर भगवान श्री कृष्ण ने देखा कि देवी गंगा अर्जुन की मृत्यु से मुस्कुरा रही हैं।

उसके बाद देवी गंगा माता कुंती से कहती है कि आप क्यों रो रही हो। आप के पुत्र का तो उसी का बदला मिला है, जिस प्रकार मेरे पुत्र भीष्म इसे अपने पुत्र की तरह स्नेह करता था फिर भी इस पापी ने मेरे पुत्र भीष्म का वध कर डाला, जब भीष्म की मृत्यु हुई थी, तब मैं ऐसे ही रोई थी और आज मैंने भीष्म का बदला ले लिया है क्योंकि जिस बाण से बब्रुवाहन अर्जुन का वध किया है वह मेरे द्वारा ही उसे प्रदान किया गया था।

उसके बाद भगवान श्री कृष्ण कहते हैं अर्जुन ने तो बब्रुवाहन के प्रहार को सिर्फ रोका था, स्वयं प्रहार से नहीं किया था। अर्जुन ने तो उस दिव्य बाण से आप का मान बढ़ाया था। भगवान श्री कृष्ण के तर्क सुनकर गंगा माता अर्जुन के सर को जोड़े जाने का उपाय बताती हैं जिससे अर्जुन पुनः जीवित हो गया।

दोस्तों अगर आप लोगों को हमारे द्वारा दी जानकारी अच्छी लगी, तो इसे अपने चाहने वालों के साथ शेयर करें।

Source : Amar Ujala

loading...

  • TAGS

You may also like

बॉलीवुड की इन एक्ट्रेस की उम्र हो गई 40 के पार लेकिन आज भी नहीं दिखती हैं इतनी यंग
स्वास्तिका मुखर्जी ने सुशांत को लेकर किया खुलासा, कहा- उनकी वैनिटी वैन में जाने से लगता था डर..