नमस्कार मित्रों आज आपका फिर से एक बार स्वागत है एक नए लेख में, दोस्तों जैसा कि आप सभी लोगों को मालूम है जय माता जानकी यानी सीता का जन्म नहीं हुआ था तब शिव धनुष को बड़े ही आसानी से उठाया जा सकता था यहां तक कि जो भगवान भोलेनाथ के भक्त करते हुए भी शिव धनुष को आसानी से उठा लेते थे लेकिन जब माता सीता का जन्म हुआ उसके बाद शिव धनुष को कोई भी नहीं उठा पाया तो फिर भगवान श्री राम ने कैसे उस धनुष को उठाया यह प्रश्न आपके मन में जरूर उठता होगा तो चलिए जानते हैं एक कथा के बारे में।

दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दे ऋषि विश्वामित्र इन सब के पीछे कारण माने जाते हैं आप सभी लोगों को तो ऋषि विश्वामित्र के बारे में जरूर मालूम होगा वह बहुत बड़े तेजस्वी और तपस्वी मुनि के रूप में जाने जाते थे और वे सभी विषयों में श्रेष्ठ माने जाते थे इतना ही नहीं ऋषि विश्वामित्र भगवान श्री राम के गुरु भी थे। बता दे कोई भी व्यक्ति शरीर के साथ स्वर्ग नहीं जा सकता है लेकिन ऋषि विश्वामित्र ने एक राजा को शरीर के साथ ही अपनी शक्ति के बल पर स्वर्ग भेज दिया था शिव धनुष को उठा पाने के पीछे ऋषि विश्वामित्र का हाथ माना जाता है।

ऋषि विश्वामित्र ने अपने मंत्रों की शक्ति से शिव धनुष को बांध दिया था जिसके चलते उसे कोई नहीं उठा पाता था और कहा गया था कि उस धनुष को सिर्फ वही व्यक्ति उठा सकता है जिसे माता सीता पसंद करती हो और दोस्तों जैसा कि आप सभी लोगों को मालूम है माता सीता भगवान श्रीराम को पसंद करती थी और दोनों जन्मों-जन्मों के पति पत्नी है, तो ऐसा तो सवाल ही नहीं उठता की माता सीता भगवान श्रीराम को पसंद नहीं करती।

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