नमस्कार मित्रों आज आपका फिर से एक बार स्वागत है एक नए लेख में, मजबूरी का नाम महात्मा गांधी ” यह काफ़ी पुरानी कहावत हैं. सबको पता है कि कोई भी बात बिना वजह प्रचलित नही होती। समझ तो आप गए ही होंगे। चलिए अब आगे बढ़ते है, 2 अक्टूबर के दिन 1869 में गांधी जी का जन्म हुआ था। सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का नाम इतिहास के पन्नों में सदा के लिए अमर है. गांधी सिर्फ देश में ही नही विदेशों में भी प्रसिद्ध रहे है।

1. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) जन्म से बहादुर और बोल्ड नेता नहीं थे। बल्कि उन्होंने अपनी आत्मकथा में स्वयं लिखा है कि बचपन में वह इतने शर्मीले थे वह स्कूल से भाग जाते थे ताकि उन्हें किसी से बात न करनी पड़े।

2. संयुक्त राष्ट्र ने गांधी जी के जन्म दिन 2 अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस (world non-violence day) घोषित किया है।

3. महात्मा गांधी को महात्मा की उपाधि रवीन्द्र नाथ टैगोर ने दी थी और रवीन्द्र नाथ टैगोर को गुरुदेव की उपाधि गांधी जी ने दी थी।

4. सन 1930 में उन्हें अमेरिका की टाइम मैगजीन ने “Man Of the Year” का पुरुस्कार दिया था।

5. महात्मा गांधी अपने जीवन में कभी अमेरिका नहीं गए। और ना ही कभी एयर प्लेन में बैठे।

6. गांधीजी चाहते तो भगत सिँह की फांसी रोक सकते थे पर कई लोगों का यह मानना है कि गांधीजी ने भगत सिंह के केस पर कभी गंभीरता दिखाई ही नहीं।

7. सन 1931 की इंग्लैंड यात्रा के दौरान गांधी जी ने पहली बार रेडियो पर अमेरिका के लिए भाषण दिया। रेडियो पर उनके पहले शब्द थे “क्या मुझे इस माइक्रोफोन के अंदर बोलना पड़ेगा?” “Do I have to speak into this thing?”

8. एक बार गांधी जी को टिकट होने के बावजूद एक अंग्रेज और टिकट कलेक्टर ने “काला” होने के कारण ट्रेन से धक्का मार कर उतार दिया था। यह उनका किसी अंग्रेज के साथ सबसे कड़वा अनुभव था।

9. एक बार गांधी जी का जूता चलती ट्रेन में से नीचे गिर गया। उन्होंने तुरंत अपना दुसरा जूता भी उतार कर ट्रेन फेंक दिया। पूछने पर उन्होंने कहा “एक जूता न तो मेरे काम आएगा न ही उसके जिसे मेरा दूसरा जूता मिलेगा। कम से कम अब वह आदमी तो दोनों जूते पहन सकेगा जिसे मेरे दोनों जूते मिलेंगे”।

10. गांधी जी ने जब अपनी क़ानून की पढ़ाई ख़त्म कर इंग्लैंड में वकालत शुरू की तो वह पूरी तरह असफल साबित हुए। यहां तक कि अपने पहले केस में उनकी टांगें काम्पने लगीं थी और वह पूरी बहस किये बिना ही बैठ गए थे और केस हार गए।

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Source : Amar Ujala

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