इंटरनेट डेस्क: धर्म के अनुसार हर भक्त अपने आरध्य देव को मनाने के लिए कई कठोर उपवास करते है, जिससे देख भगवान प्रसन्न होकर उन्हे सुख की प्राप्ति हों जैसे कई वचन देते है। जिससे भक्तों के सारे कष्ट दूर हो सके। ऐसे में हर भक्त अपने मन में भगवान के प्रति अटूट आस्था रखता है। ऐसे में आपने कहीं बार पूजा में या मंदिर जाते हुए देखा होगा कि पूजा में बैठते समय अपने सिर को ढक लेते हैं। ये सिर्फ हिन्दू धर्म में ही नहीं बल्कि हर धर्म में पूजा.पाठ करते वक्त सिर को ढकने का प्रावधान है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा कहीं पर कपड़े से ढककर तो कहीं पर टोपी लगाकर सिर को ढक लिया जाता है। ऐसा क्यों होता है इसका पीछे क्या कारण आइए जानते है..

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दरअसल सिर ढंककर रखना सम्मान सूचक भी माना जाता है। इसलिए भक्त अपने भगवान के प्रति सम्मान रखते हुए सर को ढकते है।

क्योंकी सिर के मध्य में सहस्त्रारार चक्र होता है, जिस पर पूजा करते वक्त निगेटिव चीजों का असर नहीं रहता। इस कारण सिर ढक कर पूजा करनी चाहिए।

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यहीं नहीं मान्यता के अनुसार जिसका हम सम्मान करते हैं या जो हमारे द्वारा सम्मान दिए जाने योग्य है उनके सामने हमेशा सिर ढककर रखना होता है। इसलिए भक्त पूजा के समय सिर पर और कुछ नहीं तो कम से कम रूमाल ढकते है। इससे मन एकाग्र बना रहता है। क्योंकी नग्र सिर भगवान के समक्ष जाना ठीक नहीं माना जाता है। जिन्हें आदर देते है, उनके सामने भी सिर ढककर रखना चाहिए।

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