इंटरनेट डेस्क हमारी हिंदू संस्कृति में शादी ब्याह को लेकर कई तरह की रस्में निभाई जाती है ऐसा ही कुछ जब दुल्हा दुल्हन के घर बारात लेकर आता है तो तोरण मारने की रस्म होती है तोरण मारने की ये खूबसूरत रस्म सदियों से हमारी हिंदू संस्कृति के परिवारों में होती हुई आई है। क्या आपको पता है कि शादी ब्याह के मौके पर दुल्हे के द्वार पर आने पर ये रस्म क्यों की जाती है।

अगर आपको इस रस्म के पीछें की सच्चाई के बारे में नही पता तो जान ले ये बात...

तोरण मारने रस्म सदियों से चली आ रही है। लेकिन अधिकतर लोग नहीं जानते कि यह रस्म कैसे शुरू हुई। दरअसल इस रस्म के शुरु होने के पीछें प्राचीन दंत है

इस कथा के अनुसार तोरण नाम का एक राक्षस था, जो शादी के समय दुल्हन के घर के द्वार पर तोते का रूप धारण कर बैठ जाता था। जब दूल्हा द्वार पर आता तो वह उसके शरीर में प्रवेश कर दुल्हन से स्वयं शादी रचाकर उसे परेशान करता था। एक बार एक साहसी और चतुर राजकुमार की शादी के वक्त जब दुल्हन के घर में प्रवेश कर रहा था अचानक उसकी नजर उस राक्षसी तोते पर पड़ी और उसने तुरंत तलवार से उसे मार गिराया और अपनी शादी को सफलतापूर्वक पूरा किया बस तभी से शादी ब्याह के मौकों पर तोरण मारने की रस्म शुरु हुई

आपके शादी के दौरान अक्सर देखा होगा जब दुल्हा घर पर आता है तो इस रस्म में दुल्हन के घर के दरवाजे पर लकड़ी का तोरण लगाया जाता है, जिस पर एक तोता (राक्षस का प्रतीक) होता है। बगल में दोनों तरफ छोटे तोते होते हैं। दूल्हा शादी के समय तलवार से उस लकड़ी के बने राक्षस रूपी तोते को मारने की रस्म पूरा करता है तभी दुल्हा शादी वाले द्वार में आगे बढता है।

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