इंटरनेट डेस्क: राजस्थान जिसकी संस्कृति भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया में फैली है। यहीं वजह है की भारत में आने वाला हर तीसरा विदेशी पर्यटक राजस्थान जरूर घूमने आता है। भाषा, पहनावा, बोलचाल यहां तक की मसालेदार भोजन का स्वाद भी हर किसी को राजस्थान खींच लाता है। यहां की संस्कृति अपने विशेष खानपान और वेशभूषा को लेकर हमेशा से ही दुनिया में फेमस रही है।

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बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी राजस्थानी संस्कृति की छटा देखने को मिलती है। उसी तरह राजस्थानी महिलाओं के पहने जाने वाले आभूषण भी हर किसी को यहां खींच लाता है। महिलाओं के खास आभूषण इस संस्कृति की में एक खास पहचान बनाए हुए है। जिसे कई महिलाएं शुभ अवसर पर पहनती है, तो कही महिलाए अपने दैनिक दिनों में भी इन्हे पहने रखती है। जिसमें उनका लुक तो खूबसूरत नजर आता है, साथ ही वह राजस्थानी संस्कृति में घुली नजर आती है।

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पुराने समय से ही राजस्थानी महिलाओं में विशेष आभूषण पहनने का एक खास रिवाज रहा है जिसे वह सिर से पैरों तक पहने रखती है। माथें पर टीका या रकडी, जिसे बोर बोरला कई मारवाडी शब्द के अनुसार भी बोला जाता है। यह आभूषण महिलाओं के लिए सुहाग की निशानी होती है। जौधपुर, जैसलमेर, बाडमेर, बिकानेर, पाली और जालोर की महिलाए गले में सोने से बना आड़ पहनती है, जो दिखने में बेहद खूबसूरत होता है। यह नेकलेस की तरह ही होता है। इन महिलाओं को आज भी फैशन ट्रेंड पसंद नहीं है, यह पुराने समय से पहने जाने वाले आभूषणों को ही ज्याद महत्व देते है। जिसकी वजह से आज दुनियभर के लोगों को राजस्थानी संस्कृति बेहद पसंद आती है। इसी तरह और भी कई आभूषण है जिन्हे राजस्थानी महिलाएं पहनती है, जैसे सांकली, रखड़ी, बोरला, सरल भाषा में बोर, टीला, शीशफूल रखड़ी की तरह होता है, सूरमा, मांग, मेबंद, टीका, टिकड़ा जिन्हे महिलाएं सिर पर सजाया रखती है, जो विशेष तौर पर सुहान की निशानी मानी जाती है।

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गले में मान्द्लिया, खुन्गाली, पंचलड़ी, जंजीर, बजट्टी, तुलसी, तिमानिया, हांसली,चंद्रहार, पोत, बजरबंटी, बलेवडा, चंपकली, हांकर, सरी, कंठी, कंठमाला, आदि ऐसे कई आभूषण है जिन्हे गले में पहना करती है। कानों के लिए टोटी, झेंला, लौंग, छेलकड़ी, मुरकिया, पीपलपत्रा, कर्णफूल, अंगोट्या, बाली, झूमका, सुरलिया, लटकन होते है। नाक पर लूंग, नथ, कांटा, लटकन, वारी, चौप, चूनी, चोप, भंवरियो आदि होते है। कमर में कंदोरा, तगडी, कणकती, सटका होते है। बाजू में बाजूबंद, भुजबंध, अणत, तकया, टड्डा अंगुली में बीठी अंगुठी, मूंदडी, कुडक़ नथडी या भंवरकडी, हाथ में चुडा, चूड़ी, नोगरी, हाथफूल, आंवला, कड़ा, कंगनए चांट आदि होते है। इसी तरह पैरों के लिए पेंजनी, आंवला, कड़ा जो चांदी से बने होते है, टणका, आंवला, जीवी, तोडा, छड़, पायजेब, पायल आदि होते है।

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