कल्चरल डेस्क: भारतीय संस्कृति में महिलाओं को लेकर कई इस देश में कई तरह की परम्पराएं है, जिसका पालन हर महिला कई समय से करती आ रही है। जो आज भी हमारी संस्कृति की एक खास पहचान भी है। इन्ही परम्पराओं में से एक है महिलाओं का घूंघट जो महिला के सिर का घूंघट अपने से बड़ो के सम्मान और मर्यादा का प्रतीक है। हर महिला अपने से बड़े पुरुष या सुसराल में जाने के बाद ससुर के सम्मान को बनाए रखने के लिए सिर को ढककर रखती है। लेकिन आखिर महिलाए सिर पर घूंघट लेती क्यों है। इसकी पीछे भी एक वजह है आइए जानते है..

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महिलाओं दृारा सिर को ढकने की प्रथा बेहद प्राचीन समय से है। जो हमेशा ही हमारे अंदर जिज्ञासा को बढ़ाते हुए नजर आई है। इसके लिए सिर पर घंूघट डालना बड़ों के सम्मान को दर्शता है। यही कारण है कि महिलाएं अपनों से बड़ों के सामने घूंघट करती हैं। लेकिन समय और फैशन की इस दुनिया में बदलाव आने के कारण अब महिलाए थोड़ा कम घूंघट रखने के लगी है, लेकिन फिर भी संस्कृति की महिला आज भी इस घूंघट की परम्परा को बनाए हुए है।

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हिन्दू धर्म ग्रंथों की अगर बात करें तो इसमें महिलाओं को पर्दे में रहने का कोई उल्लेख नहीं है। हिन्दू संस्कृति में पूजा के समय भी सर पर घूंघट रखना भी जरूरी नहीं माना गया है, लेकिन मां की पूजा करते समय महिला अपना सिर ढकती है। उनके सामने अपनी झोली भी फैलाती है। वैसे अगर प्राचीन समय की बात करें तो महिलाएं खुद को पर्दे में रखती आई है। इसके पीछे है अन्य पुरुषों से अपनी सुरक्षा करना। जिससे वे सुरक्षित रह सके। यहीं नहीं मुस्लिम समाज में भी महिलाएं पर्दे की पीछे रहती है। इसके पीछे एक वजह ये भी है कि वे पहले की महिलाएं अक्रामणकारियों की बुरी इरादों से अपने आपकों बचाने के लिए महिलाओं को पर्दो के पीछे रखा जाता था।

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