इंटरनेट डेस्क: हिंदू संस्कृति में विवाह को लेकर कई तरह की रस्मों को निभाई जाती है। शादी के समय निभाई जाने वाली हर रस्म का अलग महत्व होता है, जिसका हर हिन्दू परिवार अच्छे से इन रस्मों का पालन भी करते है। शादी के रस्में दुल्हा और दुल्हन के लिए ही होती है, जिससे उनकी जिंदगी खुशहल हो सके। जिस तरह दुल्हन के लिए लाल रंग का जोड़ा और सोलह श्ऱंगार महत्व रखता है, तो वही दुल्हे के लिए भी इस खास दिन कई रस्मे होती है, जिन्हे दुल्हा द्वारा निभाई जाती है। उन्ही में से एक रस्म है जब दुल्हा दुल्हन के घर बारात लेकर आता है तो तोरण मारने की रस्म होती है तोरण मारने की यह रस्म सदियों से हमारी हिंदू संस्कृति से जुड़ी है। पर क्या आप जानते है इसकी पीछे आखिर क्या वजह है, विवाह के मौके पर दुल्हे के द्वार पर आने पर ये रस्म क्यों की जाती है। आइए जानते है..

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वैसे तो शादी की ज्यादातर रस्में दुल्हन के लिए ही होती है, पर दुल्हे द्वार तोरण मारने की रस्म भी बेहद अहम होती है। अधिकतर लोग नहीं जानते कि यह रस्म कैसे शुरू हुई। एक कथा के अनुसार तोरण नाम का एक राक्षस हुआ करता था, जो शादी के समय दुल्हन के घर के द्वार पर तोते का रूप धारण करके बैठ जाता था। जब दूल्हा द्वार के करीब आता है, तो वह उसके शरीर में प्रवेश कर दुल्हन से स्वयं शादी रचाकर उसे परेशान किया करता था। एक बार एक साहसी और चतुर राजकुमार का विवाह की रस्मे निभाई जा रही थी। जब साहसी दुल्हा दुल्हन के घर में प्रवेश कर रहा था अचानक उसकी नजर उस राक्षसी तोते पर पड़ गई, उसने तुरंत तलवार से उसे मार गिराया और अपनी शादी को सफलतापूर्वक सभी रस्मों के साथ पूरा किया, बस तभी से विवाह के मौकों पर तोरण मारने की रस्म शुरु हुई।

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शादी के दौरान अक्सर देखा होगा जब दुल्हा दुल्हन के घर के द्वार पर आता है, तो इस रस्म में दुल्हन के घर के दरवाजे पर लकड़ी का तोरण लगया होता है, जिस पर एक तोता और राक्षस का प्रतीकद्ध होता है। बगल में दोनों तरफ छोटे तोते होते हैं। दूल्हा शादी के समय तलवार से उस लकड़ी के बने राक्षस रूपी तोते को मारने की रस्म पूरा करता है तभी दुल्हा शादी वाले द्वार में आगे बढता है।

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