इंटरनेट डेस्क : हमारी हिंदू संस्कृति मे कई तरह के उपवासों का एक विशेष महत्व है ऐसा ही कुछ प्रदोष के उपवास को लेकर भी है प्रदोष का उपवास करना हर व्यक्ति के लिए बेहद लाभदायक होता है हमारी हिंदू संस्कृति मे मान्यता है की अगर इस उपवास को जो भी भक्त करता है उसे भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है और साथ ही हर भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का बेहद सरल उपाय है।

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लेकिन अगर आप भी प्रदोष का ये व्रत करते है तो इस व्रत से जुड़ी इन विशेष बातों को अवश्य जान लेंवे जो आपके लिए बेहद लाभकारी है...

इस व्रत को करने के खास नियम है जब भी आप इस व्रत को करें तो त्रयोदशी के दिन प्रात: सूर्य उदय से पूर्व उठें ऐसा करना आपके लिए बेहद लाभकारी होगा। और नहाकर भगवान शिव का ध्यान करें । इस व्रत के दौरान भोजन नही किया जाता है। साथ ही किसी तरह के गुस्सें और विवाद से दूरी बनाकर रखें। ब्रह्मचर्य का पालन करें और किसी को भी अपशब्द ना कहें। पूरें दिन का उपवास करने के बाद सूर्यास्त के एक घंटा पहले नहाकर पूजा करें । जहां आप पूजा कर रहें वह जगह आप गंगाजल या गौमूत्र से शुद्ध करें और गोबर से लीपकर मंडप तैयार करें। और जब आप पूजा मे बैठे तो पूजा मे कंबल या कुशन के आसन का ही प्रयोग करें।

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इस व्रत की पूजा मे आपके पासपूजा की थाली में अबीर, गुलाल, चंदन, अक्षत (चावल), फूल, मदार के फूल, धतूरा, बिल्वपत्र, जनेउ, कलावा, दीपक, कपूर और अगरबत्ती होना अनिवार्य है।

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इस व्रत के दौरान आप इन चीजों का सेवन कर सकते है सुबह उठकर दूध पी सकते हैं। इसके बाद पूरे दिन व्रत धारण करें और कुछ न खाएं। प्रदोष काल में शिव जी पूजा करने बाद फलाहार का सेवन कर सकते है लेकिन नमक ना खाएं सिर्फ आप फलों का सेवन कर सकते है।

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