इंटरनेट डेस्क : हमारे हिंदू धर्म में कई तरह के पवित्र दिनों का खास महत्व है ज्येष्ठ मास में शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि का भी हमारे हिंदू धर्म में विशेष महत्व है जिसे हम निर्जला एकादशी के रुप में मनाते है इस विशेष दिन कई तरह के कार्यक्रम मंदिरों में आयोजित किए जाते है तो वही दान –पुण्य का भी ये विशेष दिन है इस दिन उपवास रखने वाले भक्त पूरें दिन जल को ग्रहण नही करते है और निर्जला एकादशी का उपवास रखते है । निर्जला एकादशी का व्रत विधान करके आप अपनी हर समस्याओं से मुक्ति पा सकते है। और आप पर भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है । निर्जला एकादशी पर निर्जल रहकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है और दीर्घायु और मोक्ष का वरदान प्राप्त होता है ।

आइए जानें इस विशेष दिन पूजा-पाठ के विशेष महत्व के बारें में ...

हर दिन शुभ बनाने के लिए करें शास्त्रों में बताए गए है ये खास काम

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निर्जला एकादशी का उपवास एक दिन पहले अर्थात दशमी तिथि की रात्रि से आरम्भ हो जाता है और रात्रि में अन्न का सेवन नहीं किया जाता है निर्जला एकादशी के व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्य उदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है। सुबह जल्दी उठकर साफ सुथरें कपड़े पहनकर भगवान विष्णु को पीले चंदन पीले फल फूल से पूजा की जाती है वही भगवान विष्णु की समक्ष पीली मिठाई को अर्पित किया जाता है और 108 बार ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जाप करें जाप के बाद गुलाब या आम के शरबत का भोग भगवान विष्णु को लगाएं और जरूरतमंद लोगों में बांटे ऐसा करना आपके लिए अत्यन्त लाभकारी होगा।

यह खास बाते और भी जिसे आप निर्जला एकादृशी के उपवास में रखेगी तो ठीक होगा...

निर्जला एकादशी पर आप सूर्य उदय से पहले उठे और घर में लहसुन प्याज और तामसिक भोजन बिल्कुल भी ना पकाएं ऐसा करना वर्जित होता है।

जब आप भगवान विष्णु की अराधना इस दिन करें तो पूजा-पाठ में साफ सुथरें कपड़े पहने ।

निर्जला एकादशी के उपवास में अपने मन को शांत रखना बेहद जरुरी होता है वह घर का भी माहौल शांत बनाए रखना ठीक होगा।

इस दिन ये उपाय करने अत्यन्त लाभकारी होगे...

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निर्जला एकादशी का उपवास जो लोग करते है उन्हे जरुरत मंद लोगों को फल अन्न आसन जूते छतरी और शरबत जैसी चीजों का दान करना अत्यन्त लाभकारी होता है ऐसा करने से आपकी हर मनोकामना पूरी होती और आपको हर तरफ के पापों से मुक्ति मिलती है।

एक चकोर भोजपत्र पर केसर में गुलाबजल मिलाकर ओम नमो नारायणाय मन्त्र तीन बार लिखें ऐसा करना भी काफी लाभकारी होगा।

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