आप सभी लोगों ने तो महाभारत की कहानी पढ़ी और सुनी होगी महाभारत में बताया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस धरती पर पापियों का अंत करने के लिए अवतार लिया था और महाभारत का युद्ध कौरव और पांडवों के बीच हुआ था जिसमें सभी पांडवों ने कौरवों को मारकर युद्ध में जीत हासिल की थी। लेकिन देखा जाए तो कौरवों की तरफ भी कई बड़े-बड़े और शक्तिशाली योद्धा थे, जिनकी शक्ति का सामना करना पांडव पक्ष के किसी योद्धा की बस की बात नहीं थी।

Third party image reference

आज हम आप लोगों को महाभारत काल की एक ऐसी शक्तिशाली योद्धा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने महाबली भीम को तीन बार जीवनदान दिया था। दोस्तों हुआ अयोध्या कोई और नहीं बल्कि महाभारत काल का एक पराक्रमी धनुर्धर कर्ण है। करण एक ऐसा पराक्रमी और शक्तिशाली योद्धा था जिसे उसकी परिस्थिति ने अधर्म के खिलाफ बना दिया। शक्ति में तो कर्ण अर्जुन से भी काफी ज्यादा शक्तिशाली था क्योंकि कर्ण को गुरु परशुराम ने शिक्षा दी थी।

Third party image reference

लेकिन महाभारत का युद्ध दुर्योधन के अहंकार और कर्ण के पांडवों के प्रति ईर्ष्या के कारण हुआ माना जाता है। इस युद्ध में कौरव वंश का पूरी तरह से सर्वनाश हो गया था बताने कारण एक शक्तिशाली योद्धा होने के साथ-साथ एक बहुत बड़ा दानवीर भी था। एक बार स्वयं इंद्र ने वेश बदलकर कर्ण की परीक्षा ली थी और उसे दान के रुप में उसका कवच कुंडल मांग लिया था लेकिन कर्ण ने बेझिझक इंद्र को अपना कवच कुंडल दान दे दिया था। लेकिन दोस्तों सोचने वाली बात तो यह है कि जब कर्ण सभी पांडव से ज्यादा शक्तिशाली थे तब कर्ण किसी भी पांडवों को क्यों नहीं मारा।

Third party image reference

दोस्तों आखिर क्यों करना ने भीम को तीन बार जीवनदान दे दिया था दोस्तों बात उस समय की है यह महाभारत का युद्ध प्रारंभ नहीं हुआ था तब, करण की माता कुंती कर्ण को उसकी सच्चाई के बारे में बताती है और उसे वचन मांगती है कि वह किसी भी पांडवों का वध नहीं करेगा। उसके बाद करना अपनी माता को वचन देता है कि उसके 5 पुत्र को कुछ नहीं होगा। इसी कारण कर्ण ने भीम से युद्ध होने पर भीम को तीन बार जीवनदान दे दिया था।

loading...

loading...

You may also like

दुनिया की सबसे खूबसूरत काली लड़की जिसकी खूबसूरती देखकर चौक जाएंगे आप
देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दिवाली पर बनाएं ये विशेष रंगोली डिजाइन