इंटरनेट डेस्क : हमारी भारतीय संस्कृति मे कई तरह के खास त्योहारों का अपना एक अलग ही महत्व है त्योहारों को लेकर कई तरह के खास धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजित किए जाते है ऐसा ही कुछ पौष मास की पूर्णिमा से शुरू होने वाले कुंभ मेले को लेकर भी है जिसका आगाज 14 जनवरी से होने वाला है कुम्भ मेले का पर्व विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक एवं धार्मिक पर्व है भक्तों का सबसे बड़ा संग्रहण है इस मेले के दौरान देखने को मिलता है सैकडों की संख्या मे भक्त इस पावन धरती पर भक्त अपने कदम रखते है ।हिन्दू धर्मावलम्बी तीर्थयात्रीगण के बीच कुंभ एक सर्वाधिक पवित्र पर्व है। करोड़ों महिलायें, पुरूष, आध्यात्मिक साधकगण और पर्यटक आस्था एवं विश्वास की दृष्टि से इस पर्व मे शामिल होते हैं।

तो चलिए जानते है इस पर्व के खास महत्व के बारे मे ...

कुंभ मेले का आगाज पौष मास की पूर्णिमा से प्रारंभ होता है यह मेला प्रत्येक चौथे वर्ष नासिक, इलाहाबाद, उज्जैन और हरिद्वार में बारी-बारी से आयोजित होता है। प्रयागराज में जहां गंगा, यमुना एवं सरस्वती के संगम पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है तो वहीं हरिद्वार में कुंभ मेला गंगा के तट पर आयोजित किया जाता है। अगर बात नासिक की हो तो नासिक में कुंभ मेले का आयोजन गोदावरी के तट पर किया जाता है उज्जैन में नर्मदी नदी के किनारे कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।

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इस मेले के पीछे कुछ आध्यात्मिक कारण हैं लोगों का मानना है की कुंभ प्रकाश की और ले जाता है। यह एक ऐसा स्थान है, जहां बुद्धिमत्ता का प्रतीक सूर्य का उदय होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर कुंभ का आयोजन होता है उसे उसे ब्रह्माण्ड का उद्गम और पृथ्वी का केंद्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ब्रह्माण्ड की रचना से पहले ब्रह्मा जी ने यहीं अश्वमेघ यज्ञ किया था। इस यज्ञ के प्रतीक स्वरूप दश्वमेघ घाट और ब्रम्हेश्वर मंदिर अब भी यहां मौजूद हैं।

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जिसको लेकर इस विशेष मेले का आयोजन यहां किया जाता है हमारी हिंदू संस्कृति के अनुसार इस कुंभ मेले की पवित्र नदियों मे डुबकी लगाने से आपको अपने पुराने पापों से मुक्ति मिलती है इस मेले का अदभुत संयोग करीब 30 वर्ष बाद बन रहा है।

कुम्भ का ये खास तात्विक अर्थ भी है..

कुम्भ सृष्टि में सभी संस्कृतियों का संगम है।

कुम्भ आध्यत्मिक चेतना है।

कुम्भ मानवता का प्रवाह है।

कुम्भ नदियां, वनों एवं ऋषि संस्कृति का प्रवाह है।

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कुम्भ जीवन की गतिशीलता है।

कुम्भ प्रकृति एवं मानव जीवन का संयोजन है।

कुम्भ ऊर्जा का श्रोत है।

कुम्भ आत्मप्रकाश का मार्ग है।

जो हमारी भारतीय संस्कृति मे एक विशेष महत्व रखता है।

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