इंटरनेट डेस्क : होली का त्योहार नजदीक है जिसको लेकर पूरा बाजार रंग-बिरंगी पिचकारी और रंगों से सरोबार है इस खास दिन पूरा हिंदुस्तान बड़ी ही धूमधाम से इस त्योहार को मनाता है इस दिन दुश्मन को भी रंग लगाकर पुराने गिले शिकवे मिटाए जाते है जो भाई चारा का शुभ संदेश देने वाला त्योहार है।हिंदू संस्कृति में मनाया जाने वाला ये शुभ पर्व जहां 20 मार्च को होली के दहन है तो वही 21 मार्च को रंगों से खेलने वाली होली है । होली और दीपावली दोनों ही त्योहार पूरे भारत में श्रद्धा और बड़ी धूमधाम के साथ मनाए जाते हैं। होली का त्योहार फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है जिसे बुरी आत्माओं के जलने के रूप में देखा जाता है। इसी जश्न को अगले दिन होली के रंगों के साथ मनाया जाता है। होलिका दहन का कार्यक्रम कभी भी भद्रा काल में नहीं होता है।

होली के त्योहार के पीछें ये यह विशेष कथा है जो हिंदू संस्कृति में एक विशेष महत्व रखती है...

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होली का त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है होली को जब दहन किया जाता है तो उसकी राख से हर घर में एक विशेष पूजा होती है जिसके धुएं से हमारे घर का पूरा वातारण खुशनुमा बना रहता है। बुराई पर अच्छाई की विजय के रुप में मनाया जाने वाले इस त्योहार को लेकर यह विशेष कथा जुडी हुई है। पर्व के दिन होलिका और भक्त प्रह्लाद को याद किया जाता है। कथा अनुसार भक्त प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप को अपने पुत्र से बहुत नफरत थी और इसकी वजह थी की वो अपने पिता के बजाय भगवान विष्णु की पूजा किया करते थे अपने भाई की ख़ुशी के लिए होलिका, जिसे अग्नि से ना जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई। भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की लेकिन वरदान का गलत उपयोग करने वाली होलिका जल गई भगवान के प्रति सच्ची आस्था और श्रध्दाभाव से मनाया जाने वाला ये त्योहार सच्चाई की जीत है जिसे हर हिदुंस्तानी मनाता है।

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