इंटरनेट डेस्क : सावन का पवित्र माह चल रहा है सावन के इस माह में भगवान भोले को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई चीजों का अर्पण भोले के समक्ष किया करता है भोले की महिमा अपार है शिव को प्रसन्न के लिए भक्त कई चीजों का अर्पण भोले भगवान के सामने करते है भगवान शिव के अलग –अलग रुप है भोले को महादेव, भोलेनाथ, शंकर, रूद्र, नीलकंठ के नामों से जाना जाता है जो लोग तंत्र साधना करते है वह उन्हे भैरव के नाम से भी जाना करते है । भगवान शिव के अलग-अलग श्रृंगार आभूषणों का भी विशेष महत्व है जिसके बारे में शायद आपको पता ना हो।

भगवान शिव के गले में नाग और हाथों में त्रिशूल और डमरू विराजित रहते है जो उनके रुप को बेहद खूबसूरत दिखाते है...

भगवान शिव के मस्तक पर अक्सर तीसरी आंख देखी जाती है ऐसा कहा जाता है कि मनुष्य अपनी दोनों आँखों से सांसारिक वस्तुओं को देखने का काम करता है। वहीँ भगवान शिव तीसरी आंख से सांसरिक वस्तुओ को हटाकर संसार का बोध करवाते है इसी वजह से उन्हें त्रयम्बक कहा जाता है।

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उनके गले में सांप देखें जाते है योग में साँप को कुंडलिनी का प्रतीक माना जाता है इसे अंदरूनी उर्जा का दर्जा प्राप्त है जो अब तक उपयोग नहीं हुई है। कुंडलिनी के स्वाभाव वजह से उनके अस्तित्व का पता नही चल पाता है व्यक्ति के गले के गड्ढे में विशुद्ध चक्र होता है जो बाहर के हानिकारक प्रभावों से बचाता है। साँप में ज़हर होता है और विशुद्धि चक्र को झेलने की संज्ञा दी गयी है।

भगवान शिव के त्रिशूल का भी विशेष महत्व है शरीर में मौजूद तीन मूलभूत नाड़ियों बायीं, दायीं और मध्य को दर्शाती है। इससे लगभग 72000 नाड़ियाँ निकलती हैं। जो सजगता की स्थिति को दर्शाती है और उर्जा की गति अनियमित ना होकर नियमित मार्ग से होकर गुजरती है।

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भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा भी बेहद शोभायमान लगता है सोम का अर्थ चन्द्रमा है, भगवान शिव चंद्रमा धारण किए हुए होते है इसलिए उन्हे सोम भी कहा जाता है। , जिसका मतलब नशा होता है। नशे में रहने के लिए केवल मई या अन्य नशीली वस्तु की जरुरत नहीं होती है। एक इंसान अपने जीवन में मदमस्त होकर भी नशे में रह सकता है। इस बात का अर्थ है की व्यक्ति को नशे में रहने के साथ सचेतावस्था में भी रहने की जरुरत होती है ।

सावन महीने में इस वजह से ससुराल की बजाएं मायके में रहती है नई नवेली दुल्हन

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