इंटरनेट डेस्क : गणेश चतुर्थी की रौनक आज प्रदेशभर में देखी जा रही है बड़ी ही धूमधाम से गणेश चतुर्थी का पर्व जोरों शोरों से मनाया जा रहा है हर घर में आज भगवान गणेश की स्थापना का शुभ दिन है हमारे हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा के बिना किसी भी शुभ काम की शुरुआत नही की जाती है । भगवान गणेश महादेव शिव और पार्वती की संतान है और अगर भगवान गणेश के स्वरुप की बात करें तो भगवान गणेश का स्‍वरूप अद्भुत है। उनकी नाक हाथी की सूंड की तरह और बड़े-बड़े कान हैं।

आइए जाने भगवान गणेश से जुड़ी रोचक जानकिया जिसके बारे में शायद आपको पता ना हो...

भगवान गणेश को सफलता एवं मुसीबतों तथा दुश्‍मनों का संहारक माना जाता है। उन्‍हें शिक्षा, ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि का कारक भी माना गया है भगवान गणेश को हिंदू धर्म के पांच प्रमुख देवी-देवताओं (ब्रह्म, विष्‍णु, महेश और मां दुर्गा) में गिना जाता है। इनकी पंचयत्‍न पूजा की जाती है।


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मां पार्वती ने अपने शरीर के मैल से भगवान गणेश का निर्माण किया था। शिव महापुराण के अनुसार भगवान गणेश के शरीर का रंग हरा और लाल है। पुण्‍यक व्रत ब्रह्मवर्ती पुराण के अनुसार पुत्र की प्राप्‍ति के लिए मां पार्वती ने पुण्‍यक व्रत रखा था। इसी व्रत के फलस्‍वरूप भगवान कृष्‍ण ने मां पार्वती के यहां पुत्र के रूप में जन्‍म लिया था।

भगवान गणेश का मुंह हाथी का मुख है इस बात का कारण यह भी है की गणेश और शनि देव ब्रह्मवावर्त पुराण के अनुसार जब सभी देवी-देवता भगवान गणेश को अपना आशीर्वाद दे रहे थे तब शनि देव उनसे मुंह फेरकर खड़े थे। जब मां पार्वती ने शनि देव से उनके इस कृत्‍य का कारण पूछा तो उन्‍होंने कहा कि अगर उनकी सीधी दृष्टि गणेश जी पर पड़ गई तो उनका सिर धड़ से अलग हो जाएगा। लेकिन मां पार्वती ने उनकी एक बात नहीं मानी और उन्‍हें गणेश जी की ओर देखकर आशीर्वाद देने को कहा। इस वजह से गणेश का सिर उनके धड़ से अलग हुआ । तब भगवान श्री हरि ने अपने गरुड़ पर सवार होकर उत्तर दिशा की ओर पुष्‍पभद्रा नदी के पास एक हथिनी के पास सो रहे उसके शिशु का सिर लाकर भगवान गणेश के सिर पर लगाया और उन्‍हें नया जीवनदान दिया।

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यह भी माना जाता है की भगवान शिव ने क्रोध में आकर त्रिशूल से सूर्य देव पर प्रहार किया था। तब सूर्य देव के पिता ने क्रोधित होकर भगवान शिव को ये श्राप दिया था कि एक दिन उनके बेटे का सिर भी उसके शरीर से अलग हो जाएगा।

भगवान गणेश की पूजा में तुलसी नही रखी जाती है जिसकी खास वजह यह भी है एक दिन तुलसी देवी गंगा के किनारे बैठी थीं। उस समय भगवान गणेश वहीं पर ध्‍यान कर रहे थे। तुलसी देवी ने भगवान गणेश के सामने विवाह का प्रस्‍ताव रखा लेकिन उन्‍होंने अस्‍वीकार कर दिया। तब तुलसी ने उन्‍हें श्राप दिया कि जल्‍द की उनका विवाह होगा और इसके बदले में गणेश जी ने तुलसी को पौधा बन जाने का श्राप दिया था। बस इसी वजह से भगवान गणेश की पूजा में तुलसी को नही रखा जाता है।

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