इंटरनेट डेस्क : हमारी हिंदू संस्कृति में हर त्योहारों का अपना एक अलग ही महत्व है ऐसा ही कुछ होली के त्योहार को लेकर भी है इस वर्ष होली का त्योहार 20 और 21 मार्च को मनाया जाना है जहां 20 मार्च को होलिका दहन होगा तो वही 21 मार्च को रंगों से खेलने वाली होली का खास जश्न रहेगा जिसकी धूम चारों और अभी से ही देखने को मिल रही है हिंदू धर्म में होली मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं मशहूर है लेकिन इस त्योहार को मनाने के पीछें ये खास मान्यता भी है।

इस त्योहार को मनाने के पीछें ये कथा छिपी हुई जो बालकर प्रहलाद की है । तो वही दूसरी कथा कृष्ण की भी कृष्ण जिसे पूतना वध कथा कहते है...

प्राचीन काल में कंस नाम का एक दुष्ट राजा तो जो भगवान श्रीकृष्ण के मामा थे। कृष्ण के मामा कंस से पूरा गोकुल प्रताडित था वह इतना अत्याचारी होने के बावजूद कंस अपनी बहन देवकी से बहुत प्यार करता था कुछ समय बाद कंस ने अपनी बहन देवकी की शादी वासुदेव के साथ तय कर दी कंस इस रिश्ते से बेहद प्रसन्न था लेकिन कंस की खुशी ज्यादा समय नही टिक सकी और शादी के बाद एक आकाशवाणी हुई की तुम्हारी आठवी संतान तुम्हारे विनाश का कारण बनेगी। बस इसी आकाशवाणी की चेतावानी के बाद से ही कंस ने अपनी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को बंदी बना लिया और एक काल कोठरी में बंद कर दिया। देवकी और वासुदेवक की जितनी भी संताने हुई कंस उन्हे जन्म के साथ ही मार देता।

होलिका दहन की राख का ये है महत्व जिसकी हर घर में होती है

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लेकिन जब आठवी संतान के रुप में कृष्ण का जन्म हुआ तो भगवान ने अपनी माया से सभी पहरेदारों को बेहोश कर दिया और वासुदेव श्री कृष्ण को गोकल छोड़ आए। जब इस बात का पता कंस को चला तो कंस ने राक्षसी पूतना को गोकुल भेजकर नवजात शिशु कंस को मारने का आदेश दिया पूतना को ये वरदान था की वह अपनी इच्छा अनुसार रुप बदल सकती है धीरे-धीरें पूतना ने गोकुल के सभी बच्चों को मारना शुरु कर दिया है आखिरकार पूतना यशोदा- नंद के घर कृष्ण को मारने के लिए भी पहुंची नवजात श्री कृष्ण को मारने के लिए पूतना ने अपना जहरीला दूध पिलाने की कोशिश कृष्ण को की लेकिन कृष्ण ने ही पूतना का वध कर दिया। जब कृष्ण ने पूतना का जहरीला दूध पिया तो उनका रंग नीला हो गया ।

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सौम्य और सुंदर दिखने वाले कृष्ण नीले रंग के दिखने लगे। कृष्ण का गोरापन चला गया कृष्ण इस बात को स्वीकार नही कर पा रहें थे की उनका ये रंग राधा या गोपियों को पसंद आएगा या नही और वह इस बात से सबसे दूर होते चलें गए जिसके बाद यशोदा ने मां ने कृष्ण को सलाह दी की वो राधा को भी उसी रंग में रंग डालें जिसमें वो उसे देखना चाहते हैं तब कृष्ण, राधा के पास गए और उनके ऊपर ढेर सारा रंग उड़ेल दिया इसके बाद से ही राधा और कृष्ण एक दूसरे के प्यार में डूबते चले तभी से फागुन माह में मनाई जाने वाली होली का खास पर्व मनाया जाता है जिसकी धूम राधा कृष्ण के मदिंरों में जोरों –शोरों से देखने को मिलती है। यह त्योहार ढेर सारी खुशियां हर व्यक्ति के जीवन मे लेकर होता है और पूरा वातावरण खुशियों से सरोबार रहता है।

होलिका दहन की राख का ये है महत्व जिसकी हर घर में होती है

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