इंटरनेट डेस्क : हमारी हिंदू संस्कृति मे सूतक लगने के बाद कुछ कामों को करना वर्जित माना गया है जो इस संस्कृति मे एक विशेष महत्व रखता है सूतक के दौरान मंदिर जाना और मंदिर मे पूजा करना दोनो वर्जित होते है लेकिन क्या आपको पता है सूतक आखिर कब और क्यों लगता है जो हिंदू संस्कृति मे एक विशेष महत्व रखता है।

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सूतक व्यक्ति की मृत्यु और जन्म दोनों परिस्थितियों मे लगाया जाता है जब भी आपके परिवार मे किसी नए मेहमान का जन्म होता है तो परिवार पर दस दिन के लिए सूतक लग जाता है। इस दौरान परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी धार्मिक काम का भागीदार नही होता है ना ही वह मंदिर जा सकता है दस दिनों तक के लिए पूजा पाठ से दूरी बनाकर रखनी होती है इसके अलावा बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री भी रसोई घर मे जाना वर्जित माना जाता है जब तक बच्चे के जन्म को लेकर वह स्त्री पूजा ना कर लेंवे। सूतक का संबंध 'जन्म के' निमित्त से हुई अशुद्धि से है। जन्म के अवसर पर जो नाल काटा जाता है और जन्म होने की प्रक्रिया में अन्य प्रकार की जो हिंसा होती है, उसमें लगने वाले दोष पाप के प्रायश्चित स्वरूप 'सूतक' माना जाता है।

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तो वही दूसरी परिस्थिति सूतक की तब होती है जब परिवार मे किसी सदस्य तक की मौत हो जाती है ऐसे समय भी व्यक्ति किसी धार्मिक काम का भागीदार नही बन सकता है ना ही कोई पूजा-पाठ मे शामिल हो सकता है।

मनुष्य के जीवन में अनेक पड़ाव आते हैं जो उसके जन्म के साथ ही शुरू होते हैं और मृत्यु तक चलते है इन परम्पराओ का पालन हमारे बड़े-बुजुर्ग सदियों से करते हुए आए है । जिसका खास महत्व है।

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