इंटरनेट डेस्क : गरुड़ पुराण हमारे धार्मिक पुराणों में से एक है जिसकी रचना स्वय वेद व्यास जी ने की थी । धार्मिक शास्त्रों के अनुसार गरुड़ पुराण उन 18 पुराणों में से एक है जिसकी रचना वेद व्यास जी ने की। इसमे 279 अध्याय और 18,000 श्लोक हैं। जो एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद सुनाए जाते है गरुण पुराण को सुनकर व्यक्ति को कई तरह की बातों जानकारी मिलती है जो उन्हे एक उचित मार्ग की और प्रशस्त करते है। गरुण पुराण मे कुछ ऐसी बातें भी है जिसके बारे मे शायद आपको यह जानकारी हो की ऐसे लोगों के घर कभी भोजन ना करें जो इन अपराधी प्रवृतियों से घिरें हुए हो।

दरअसल गरुण पुराण मे चोर ,चरित्रहीन महिला, ज्यादा क्रोध करने वाले व्यक्ति के घर भोजन करना वर्जित माना गया है...

माना गया है की अगर किसी व्यक्ति ने कोई घिनौना अपराध किया है तो उस व्यक्ति के घर कभी भी भोजन ना करें । गरुड़ पुराण के अनुसार जब व्यक्ति चोर या अपराधी के घर भोजन करता है तो वो गलत तरीकों से कमाए धन का भागी बनता है।

चरित्रहीन महिला के घर भी भोजन करना अनुचित माना गया है। जो महिला धोखा देती है जिसका आचरण सही नहीं है उसके घर भोजन नही करना चाहिए वह सिर्फ समाज ही नही बल्कि भगवान की भी अपराधी है। वह दंड की भागीदार है।

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बहुत ज़्यादा क्रोध करने वाले व्यक्ति के घर भी भोजन करना अनुचित माना गया है माना जाता है की व्यक्ति क्रोध मे आकर हिंसक हो जाता है जो भगवान का भी गुनहागार है।

दुष्ट व्यक्ति या दुष्ट राजा, दोनों ही दूसरों को शोषित करते है और अपने घर मै पैसा कमाते है दूसरों को नुकसान पहुंचाकर कमाया गया पैसा उचित नही है ऐसे मे इन व्यक्तियों के घर भी भोजन ना करें तो ही बेहतर है।

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चुगलखोर वाले व्यक्ति के घर भोजन ना करें जो लोग दूसरे मे कमियां निकालते है सबसे पहले उन्हे खुद में कमी देखने की जरुरत है वह अपने तेज दिमाग का दूसरे के भले के लिए बल्कि अपने भलें के लिए इस्तेमाल करते है इन पापी लोगों के घर मे भोजन करना अनुचित होता है।

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