इंटरनेट डेस्क : होली का पर्व हालहि में जोरो-शोरों से मनाया गया जो हमारी हिंदू संस्कृति में एक विशेष महत्व रखता है तो वही होली के पर्व के साथ ही गणगौर पर्व की तैयारियां शुरु हो जाती है गणगौर का पर्व राजस्थान में सुहागन महिलाओ द्ववारा मनाया जाने वाला खास पर्व है जिसे सुहागन महिला के साथ कुंवारी कन्या भी मनाती है। होली खेले जाने वाले दिन से ही गणगौर पूजा प्रारम्भ हो जाती है जो सोलह दिन तक पूजी जाती है। विवाहित महिलाए पति की लंबी उम्र के लिए गणगौर पूजा करती है तो कुंवारी कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए गणगौर पूजा किया करती है इस पर्व की मुख्य पूजा चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया से शुरु हो जाती है 16 दिन तक महिलाएं भगवान शिव और पार्वती का व्रत और पूजन करती हैं। जहां होलिका दहन की राख से गणगौर तैयार की जाती है तो वही बासेड़ा के दिन ईसर पार्वती के जोड़े की खूबसूरत प्रतिमाओं को लाकर गणगौर पूजा की जाती है।

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चैत्र कृष्‍ण प्रतिपदा से यह त्‍योहार पूरे सोलह दिन तक चैत्र शुक्‍ल तृतीया तक मनाया जाएगा इस वर्ष यह त्योहार 21 मार्च से 8 अप्रेल तक मनाया जाएगा । सोलह दिन गणगौर पूजा करने वाली कुंवारी कन्याएं और महिलाएं इनकी पूजा करती है। और प्रत्येक दिन अलग-अलग घरों से पानी लाकर गणगौर की पूजा करती है लोकगीत इस पूजा में गाए जाते है सुबह गणगौर पूजा रोजाना 16 दिन तक की जाती है। आखिरी गणगौर वाले दिन सुहागन महिलाए पूरी सोलह श्रृंगार करके पूजा करती है नवविवाहित महिला को शादी के बाद गणगौर पूजना अनिवार्य होता है ।

तो इस वजह से मनाया जाता है महिला दिवस , जो महिलाओं के सम्मान का है खास दिन

दरअसल हमारे हिंदू धर्म गणगौर पूजने के पीछे ये खास कथा है...

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एक दिन भगवान शिव शंकर और माता पार्वती भ्रमण के लिए एक गांव गए थे, उनके साथ में नारद मुनि भी थे। जब वह एक साथ निकले तो हर कोई उनकी आवाभगत मे लग गया। कुलीन घरों में स्वादिष्ट भोजन और पकवानों की खुशबू आने लगी। लेकिन कुलीन स्त्रियां स्वादिष्ट भोजन लेकर पंहुचती उससे पहले ही गरीब परिवारों की महिलाएं अपने श्रद्धा सुमन लेकर अर्पित करने पंहुच गयी। माता पार्वती ने उनकी श्रद्धा व भक्ति को देखते हुए सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। जब उच्च घरों की स्त्रियां स्वादिष्ट पकवान लेकर आई तो माता के पास उन्हे देने के लिए कुछ भी नही बचा तब भगवान शंकर ने पार्वती जी से कहा, अपना सारा आशीर्वाद तो इन गरीब स्त्रियों को दे दिया अब इन्हें आप क्या देंगी? माता ने कहा इनमें से जो भी सच्ची श्रद्धा लेकर यहां आयी है उस पर ही इस विशेष सुहागरस के छींटे पड़ेंगे और वह सौभाग्यशालिनी होगी।

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तब माता पार्वती ने अपने रक्त के छींटे बिखेरे जो उचित पात्रों पर पड़े और वे धन्य हो गई। लोभ-लालच और अपने ऐश्वर्य का प्रदर्शन करने पंहुची महिलाओं को निराश लौटना पड़ा। मान्यता है कि यह दिन चैत्र मास की शुक्ल तृतीया का दिन था तब से लेकर आज तक स्त्रियां इस दिन गण यानि की भगवान शिव और गौर यानि की माता पार्वती की पूजा करती हैं। जो हमारी हिंदू संस्कृति का खास पर्व माना गया है। इस दिन सुहानगन महिलाए पूरी श्रध्दाभाव से ईसर गौरी की पूजा करती है ताकि उनके सुहाग पर आने वाली हर विपदा दूर हो।

शास्त्रों में बताया गया है इन विशेष फूलों का महत्व, जिन्हें दिन के अनुसार साथ रखने से होगी हर मनोकामना पूरी

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