इंटरनेट डेस्क: देशभर में गणेश चतुर्थी को लेकर भक्तों में जोश देखा जा रहा है। हर कोई इस बार भी इसे त्योहार को खास बनाने के लिए कई दिनों पहले से जुटे हुए। भगवान गणेशजी को यह दिन बेहद खास है। जिसके लिए भक्त भी इस पर्व को लेकर सभी तरह की तैयारी करने में लगे है। गणेश चतुर्थी के इस खास अवसर पर सभी लोग अपने घर पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर 10 दिनों तक उनकी पूजा.अर्चना करते हैं। जिससे हर प्रकार के कष्ट दूर हो सके। 13 सितम्बर से गणेश चतुर्थी की शुरुआत होगी जो कि अनंत चतुर्दशी तक चलेगी। इस दिन गणेश जी को मोदक और लड्डू का भोग लगाया जाता है। इसलिए आज हम आपको इस खास दिन गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय कुछ बातों को बताने जा रहे है जिन्हे ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

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गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक भगवागर गणेश की विशेष पूर्जा अर्चना की जाती है। ऐसे में आजकल बाजार में भगवान गणेश की अलग.अलग मुद्रा में मूर्तियां उपलब्ध है। पर ध्यान रहे भगवान गणेश की बैठे हुए मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है, ऐसी मूर्ति को स्थापित करने से घर में धन की वृद्धि होने लगती है, और खुशहाली होती है।

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मूर्ति खरीदते वक्त इस बात का भी ध्यान रखे की भगवान गणेश की सूंड हमेशा बाईं ओर होनी चाहिए। इस तरह की मूर्ति को ही वक्रतुण्ड माना जाता है। भगवान गणेश का वहां मूषक होता है,ै और उन्हें मोदक सबसे ज्यादा पसंद है तो हमेशा ऐसी मूर्ति खरीदिये जिसमे चूहा और मोदक दोनों होना जरूरी है।

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वैसे अब ज्यादातर लोग अपने घर में ही मिट्टी की मूर्ति बनाकर ही उनके विराजित करते हैं या किसी भी धातु से बनी मूर्ति शुभ मानी जाती है। भगवान गणेश की मूर्ति खरीदते समय उसका रंग हमेशा सफेद या सिंदूरी रंग का होना चाहिए ऐसी मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है। घर से वास्तुदोष मिटाना है तो घर के द्वार पर गणेश जी की दो मूर्तियों वाली ऐसी तस्वीर लगाए जिनकी पीठ आपस में मिली हो।

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