इंटरनेट डेस्क : सप्ताह के सात दिन होते है हर दिन एक विशेष देवता को समर्पित दिन माना गया है ऐसा ही कुछ बुधवार के दिन को लेकर भी है बुधवार का दिन भगवान गणपति को समर्पित दिन माना गया है जो विघ्नहर्ता है हमारी हिंदू संस्कृति में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणपति की पूजा के बिना नही होती है। तो वही इस दिन को लेकर एक खास मान्यता यह भी है की एक शादी शुदा लड़की इस दिन अपने मायके से ससुराल नही जाती है बुधवार के दिन बेटियों को विदा करना शुभ नही होता है।

अगर आप इस दिन बेटी की विदाई करते है तो बेटी के लिए अत्यन्त दुखदायी हो सकता है अगर आपकी बेटी की बुध ग्रह की दशा खराब हो तो आपको ऐसी गलती बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।

ऐसा भी माना जाता है की बुधवार के दिन बेटियो को ससुराल के लिए विदा करने से उनके ससुराल के साथ संबध भी बिगड़ सकते है शास्त्रों मे इस अपशकुन माना गया है।

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एक पौराणिक मान्यता के अनुसार ‘बुध’ ग्रह ‘चंद्र’ को शत्रु मानता है लेकिन ‘चंद्रमा’ के साथ ऐसा नहीं है, वह बुध को शत्रु नहीं मानता। ज्योतिष में चंद्र को यात्रा का कारक माना जाता है और बुध को आय या लाभ का। इसलिए बुधवार के दिन किसी भी तरह की यात्रा करना नुकसानदायक हो सकता है । यदि आपकी बुध की खराब दशा हो तो आपके साथ कोई घटना भी हो सकती है। और मायके से बुधवार के दिन बेटियों की विदाई करना अच्छा नही होता है।

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इस बात को लेकर एक कथा भी प्रचलित है कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक नगर में मधुसूदन नामक साहूकार का विवाह सुंदर और गुणवान कन्या संगीता से हुआ । एक बार मधुसूदन ने बुधवार के दिन पत्नी के माता-पिता से संगीता को विदा कराने के लिए कहा। उसके सास-ससुर बुधवार को अपनी बेटी को विदा नहीं करना चाहते थे। उन्होंने दामाद को बहुत समझाया लेकिन मधुसूदन नहीं माना। वह संगीता को साथ लेकर वहां से रवाना हो गया। दोनों बैलगाड़ी से घर लौट रहे थे। तभी कुछ दूरी पर उसकी गाड़ी का एक पहिया टूट गया। और वह दोनों वहां से पैदल ही चल पड़े। किसी जगह पहुंचकर संगीता को प्यास लगी तो मधुसूदन उसे एक पेड़ के नीचे बिठाकर पानी लेने चला गया। थोड़ी देर बाद ही वह जल लेकर वापस आ गया। लेकिन वह आश्चर्य में पड़ गया, क्योंकि उसकी पत्नी के पास मधुसूदन की ही शक्ल-सूरत का एक दूसरा व्यक्ति बैठा हुआ था। संगीता भी उन दोनों में अपने असली पति को नहीं पहचान पाई। मधुसूदन ने उस व्यक्ति से पूछा, “तुम कौन हो और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठे हो?”उस व्यक्ति ने कहा- “अरे भाई, यह मेरी पत्नी संगीता है लेकिन तुम कौन हो जो मुझसे ऐसा प्रश्न कर रहे हो?” यह जवाब सुनकर मधुसूदन को और भी गुस्सा आ गया और उसे नकली कहकर वह उससे झगड़ने लगा।

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उनका झगड़ा देखकर पास ही नगर के सिपाही वहां आ गए। सिपाही उन दोनों को पकड़कर राजा के पास ले गए। राजा भी निर्णय नहीं कर पा रहा था। राजा ने दोनों को कारागार में डाल देने के लिए कहा। राजा के फैसले से असली मधुसूदन भयभीत हो गया। तभी एक आकाशवाणी हुई- “मधुसूदन! तूने संगीता के माता-पिता की बात नहीं मानी और बुधवार के दिन अपनी पत्नी को ससुराल से विदा करा ले आया। अब यह सब भगवान बुध देव के प्रकोप से हो रहा है।“ मधुसूदन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने भगवान बुधदेव से क्षमा मांगी और भविष्य में कभी ऐसा नहीं करने का प्रण लिया। मधुसूदन की प्रार्थना सुनकर बुधदेव ने उसे क्षमा कर दिया। तभी दूसरा व्यक्ति अचानक गायब हो गया। इस प्रचलित कहानी के अनुसार के बुधवार के दिन एक लड़की विदाई करना अशुभ माना जाता है।

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