इंटरनेट डेस्क : हमारे हिंदू धर्म में सुहागन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए चौथ का उपवास किया करती है ऐसा ही कुछ भादवा की चौथ को लेकर भी जिसे सुहागन महिलाएं पूरी श्रध्दाभाव से किया करती है भादवा चौथ ना सिर्फ सुहागन महिलाए किया करती है बल्कि कुंवारी लड़कियां भी इस चौथ का उपवास किया करती है आइए जानें इस चौथ की दिलचस्प कहानी।

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भादवा बदी चौथ को बहुला चौथ भी कहते है। भादवा चौथ चार बडी चौथ में से एक है। इसकी पूजा कहानी, अरग वैशाख की चौथ जैसी ही होती है और उसका उघापन भी बिल्कुल भी वैसा ही होता है। भाद्र मास की चतुर्थी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है इस चतुर्थी व्रत में भगवान गणेश के साथ ही बहुला नाम की धर्म परायण गाय की पूजा की होती है ऐसा माना जाता है की नंद बाबा की गोशाला में कई गाएं थीं। इनमें कामधेनु की वंशज बहुला नाम की धर्म परायण भी थी। एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने इस गाय की परीक्षा लेने का विचार किया। बहुला एक दिन चरते हुए अपने झुंड से अलग हो गई। श्रीकृष्ण ने सिंह बनकर बहुला को घेर लिया और उस पर आक्रमण करने का प्रयास किया।

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बहुला ने प्राण संकट में जानकर सिंह से निवेदन किया कि आज उसे ना मारे क्योंकि वह अपने छोटे से बछड़े को एक बार मिलना चाहती है। उसका नवजात बछड़ा भूखा होगा उसे अंतिम बार दूध पिलाकर वह कल फिर स्वयं सिंह का शिकार बनने चली आएगी। सिंह ने बहुला की बात मान ली। अपने वचन अनुसार बहुला अनुसार अगले दिन स्वयं सिंह का शिकार बनने चली आई। बहुला की धर्म परायणता को देखकर श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न हुए और बहुला से कहा कि तुम धर्म की परीक्षा में सफल हुई। कलियुग में तुम्हारी धर्म परायणता के कारण भाद्र मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पूजा होगी। इस पूजा से महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होगी और उनकी संतान दीर्घायु तक जीवित रहेगी बस इसी कथा के अनुसार इस चौथ का विशेष महत्व हमारे हिंदू धर्म में है।

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