बच्चों के सामने भूलकर भी न करें ये बात

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शरारत करना बच्चों की प्रकृति है। बच्चें कई बार गलती करते है। उन्हें प्यार से समझाना चाहिए। यह बात सभी जानते है। लेकिन कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है जब मां-बाप बच्चों को डांटते है और उस समय वो बहुत कुछ बोल जाते है जिनका उन्हें भी अंदाजा नहीं रहता। वे बातें बच्चों को याह रह जाती है और उन पर वो बातें असर करने लग जाती है।

ऐसे शब्द मुंह से निकल जाते है जो बच्चों के दिल में घर कर जाते है। इसलिए गलती से भी उनके सामेन ऐसे शब्द न बोलें जो बाद में आपको ही भारी पड़े। ऐसे कठोर बोल बोलने से बच्चों को मनोबल टूटता है।

बच्चें मां-बाप की इज्जत करते है। उनके जैसा बनना चाहते है लेकिन कभी भी बच्चों की तुलना खुद से नहीं करनी चाहिए। हर चीज समय के अनुसार बदलती है। सलिए अपने समय की बातें उनके सामने न करें। उन्हें बार-बार यह न बोलें कि तुम्हारी उम्र में हम ये काम करते थे, अधिक जिम्मेदार थे।

बच्चों को सीखाना चाहिए कि वे अपने डिजीसन खुद लें। साथ ही उऩके डिसीजन में उनका साथ भी दें। कई पेरेंट्स बच्चों के लिए हुए निर्णय से सहमत नहीं होते है। उन्हें कहते है तुम्हारे डिसिजन हमेशा गलत होते है। ऐसा कहने के बजाय उनका साथ दे। अगर आपको लगता है कि वो गलत निर्णय ले रहे है तो उन्हें उसके दुष्परिणामों के बारे में बताएं।

बच्चों के रिजल्ट को लेकर सभी माता-पिता का सपना होता है कि उनके अच्छे मार्कस आए। लेकिन उनकी तुलना दूसरे बच्चों से न करें। तुम्हें शर्म आनी चाहिए ऐसे शब्द गलती से भी न बोलें। ये सारी बातें बच्चों को तनाव से घेर लेती है।

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