इन 16 श्रृंगारों मे बिछुआ है सुहागन के सुहाग की पहचान

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शादी के बाद हर लड़की के श्रृंगार का अपना एक अलग ही महत्व होता है शादी के बाद लड़की को पायल,अंगूठी सिंदूर, चूड़ी इन सभी को पहनना जरुरी माना जाता है। उन्ही श्रृंगारों मे से एक होता है बिछुआ पहनना बिछुआ के बिना नई नवेली दुल्हन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। यह नई नवेली दुल्हन के पैरो की शोभा तो बनता ही साथ ही उसके सुहागन होने को भी दर्शाता है। क्या आपको पता है महिलाओं के श्रृंगार मे बिछुआ के क्या महत्व होता है।

अगर बदलते दौर की बात कि जाएं तो आजकल बाजारों मे कई तरह  के डिजाइनर बिछुआ का ट्रेंड बहुत चल गया है। और कुछ महिलाएं तो इसे फैंशन के तौर पर ही अलग ढंग से पहनते हुए नजर आ ही जाती है।

शादी शुदा महिलाओं की पहचान बिछआ को पहनने से ही होती है। इसे पैरों की उंगलियों मे पहना जाता है। इसे महिलाओं के 16 श्रृंगारों की श्रेणी मे एक विशेष महत्व रखता है। इस श्रृंगार के बिना महिला का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। कहीं ऐसी प्रथा है की दुल्हन जो बिछिआ पहनती है। वह सिर्फ मायके का ही होना चाहिए ।  बिछिया  मायके के होते है जो दुल्हन के के मामा द्वारा लाया जाता है। और कहीं दूल्हा पक्ष के यहाँ से दुल्हन के बिछिया  आते है बिछिया  शादी में फेरों के वक्त दुल्हन के पेरों में पहनाये जाते है बिछिया  सबसे छोटी ऊँगली को छोडकर बाकी अंगूलियों पहने जाते है कहीं शादी के वक्त पैर के अंगूठे में भी बिछिया पहनाया जाता है जिसे अनवट बिछिया कहते है ।

अगर वैज्ञानिक तौर पर बिछिया के महत्व को देखा तो यह शरीर को बहुत फायदा करता है। ऐसा माना जाता है की पैर की दूसरी अंगुली एक नस के द्वारा महिलाओं के गर्भाशय औऱ दिल से जुड़ी होती है। बिछिया पहनने से गर्भाशय मजबूत बनाता है और महिलाओं के मासिक धर्म के समय होने वाले रक्त संचार को सही तरीके से चलाने में मदद करता है। इसलिए बिछुआ अपना एक अलग ही महत्व रखता है।

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