इंटरनेट डेस्क। हिन्दू आध्यात्म की असली पहचान तिलक से होती है। प्राचीन काल में जब भी राजा महाराजा शुभ कार्यों के लिए जाते थे तो माथे पर तिलक लगवाकर जाते थे। कोई राजा महाराजा युद्ध के लिए भी जाते थे, तो विजय के लिए अपने ईष्ट को याद करते थे और माथे पर तिलक लगाकर जाते थे।

मान्यता है कि तिलक लगाने से समाज में मस्तिष्क हमेशा गर्व से ऊंचा होता है। हिंदू परिवारों में किसी भी शुभ कार्य में "तिलक या टीका" लगाने का विधान हैं। मानना है कि मस्तक पर तिलक लगाने से शांति और ऊर्जा मिलती है।

हिन्दु परम्परा में मस्तक पर तिलक लगाना शूभ माना जाता है इसे सात्विकता का प्रतीक माना जाता है विजयश्री प्राप्त करने के उद्देश्य रोली, हल्दी, चन्दन या फिर कुम्कुम का तिलक महत्ता को ध्यान में रखकर, इसी प्रकार शुभकामनाओं के रुप में हमारे तीर्थस्थानों पर, विभिन्न पर्वो-त्यौहारों, विशेष अतिथि आगमन पर आवाजाही के उद्देश्य से भी लगाया जाता है ।

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, तिलक लगाने से ग्रहों की शांति होती है। तिलक खास प्रयोजनों के लिए भी लगाए जाते हैं। मोक्षप्राप्ति करनी हो तो तिलक अंगूठे से, शत्रु नाश करना हो तो तर्जनी से, धनप्राप्ति हेतु मध्यमा से और शांति के लिए अनामिका से तिलक लगाया जाता है। तिलक संग चावल लगाने से लक्ष्मी आकर्षित होती हैं।

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