राजस्थान के बीकानेर में फेमस है ऊंटो की खाल पर बनी ये कलाकृति

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कल्चरल डेस्क:भारत में हर देश की संस्कृति का विशेष तरह से बखान किया गया है। ऐसा ही कुछ हमारी राजस्थान संस्कृति को लेकर भी है राजस्थान में कई ऐसी फेमस जगह है जहां के खान-पान से लेकर रिति रिवाजों और परम्पराओं को अपना एक विशेष मह्त्व है ऐसा ही कुछ राजस्थान की अपना कलाकारी के लिए मशहूर उस्त कला को लेकर भी है। उस्त कला बीकानेर की फेमस कलाकारी में से एक है। आपने अक्सर बीकानेर में मिलने वाले ऊटों की खाल पर इस कला की कमाल की चित्रकारी देखी होगी जो की उस्त कलाकारी के नाम से काफी फेमस है। ऊंट की खाल पर स्वर्ण मीनाकारी और मुनव्वत का कार्य ‘उस्ता कला’ के नाम से जाना जाता है। ये फेमस कलाकृति देश विदेश के पर्यटकों को काफी लुभाती है। यह कलाकारी अत्यंत आकर्षक एवं मनमोहक का केन्द्र बनती है। शीशियों, कुप्पियों, आईनों, डिब्बों, मिट्टी की सुराही आदि पर यह कला उकेरी जाती है।

अगर इस कलाकारी के विकास को लेकर बात करें तो इस कलाकारी का विकास पद्मश्री से 1986 में सम्मानित बीकानेर के सिद्धहस्त कलाकार स्व. हिसामुद्दीन उस्ता ने किया था। उनको 1967 में राष्ट्रीय पुरस्कार से भी विभूषित किया गया था। बीकानेर के उस्ता मौहल्ले में आज भी अनेक कलाकार उस्ता कला का कार्य कर रहे हैं। उस्ता कला को कई अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों में अक्सर इसकी प्रदर्शनी भी लगाई जाती है।

देश के विभिन्न भागों के शोरूम में भी उस्ता कलाकृतियां से सजे कई तरह की चीजें भी सजावट के रुप में अक्सर लोग अपने घर मे लगवाना पसंद करते है।

बीकानेर के दरबार हॉल चन्द्रमहल गैलरी, शीश महल, अनूप महल, गज मन्दिर, लाल निवास, डूंगर निवास, सूरत विलास, भांडाशाह मंदिर आदि इसी चित्रकारी के कई दृश्य इन ऐतिहासिक स्मारकों पर देखें जाते है। वे अपनी इस कला से महलों, हवेलियों, मंदिरों इत्यादि को चित्रकला के चित्ताकर्षक इन्द्रधनुषी रंग प्रदान करते रहे।

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